लघुकथा : झूठ का दलदल – श्रीमती शेफालिका सिन्हा रांची

261

Email

लघुकथा

झूठ का दलदल

गौरव बहुत खुश है,लाक डाउन के बाद घर से निकलकर क्रिकेट मैच खेलने का मौका मिला। मैच दो मोहल्ले की टीमों के बीच था और उसकी टीम की जीत हुई। सबसे अधिक रन बना और दो कैच आउट लेने के लिए उसे मैन आफ द मैच का खिताब मिला। इस जीत पर उसे एक मेडल भी मिला। मेडल पाकर उसे ऐसा लगा कि वह देश के आइ.पी .एल या वर्ल्ड टीम का हिस्सा है,दनादन उसने हर एंगल से मोबाइल से सेल्फी ले डाली।
घर आकर सबसे पहले उसने व्हाट्सएप पर अपना प्रोफाइल बदला और स्टेटस में डाल दिया और वही हुआ जो उसकी मनोकामना थी। क्लास के बहुत सारे छात्रों और शिक्षकों तक यह बात पहुंच गई।आनलाइन क्लास चलने और क्लास के व्हाट्सएप ग्रुप के कारण बातें बढ़ती देर न लगी।
गौरव ने अपने एक मित्र के सहयोग से ऐसा नमक मिर्च लगाया कि प्रचार कुछ और हो गया। विद्यालय तक भी ये खबर पहुंची कि गौरव का चयन अंडर १६ भारतीय क्रिकेट टीम में हो गया है।
दसवीं क्लास में पढ़ने वाले गौरव को भी अंदाजा नहीं था कि मोहल्ला मैच से वह बिना किसी सच्चाई के भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बन जाएगा। इस बात की जानकारी उसके माता-पिता को भी नहीं है,जो अपने सामर्थ्य से अधिक उसके क्रिकेट की ट्रेनिंग के लिए खर्च कर रहे हैं।
इस झूठ को सच जान विद्यालय आज अपने इस होनहार छात्र को सम्मानित और पुरस्कृत करने वाला है ।
अब गौरव की खुशी गायब हो गई है,उसे खुद नहीं पता कि वह अपने झूठ के दलदल में फंस चुका है।

श्रीमती शेफालिका सिन्हा
रांची, झारखंड।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here