“मां दुर्गा और नारी शक्ति” – आज की नारी और शक्ति की उपासना के विशेष संदर्भ में डिजिटल परिचर्चा सम्पन्न

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“मां दुर्गा और नारी शक्ति” – आज की नारी और शक्ति की उपासना के विशेष संदर्भ में डिजिटल परिचर्चा सम्पन्न

सागर।
भारतीय शिक्षण मंडल महाकौशल प्रांत, महिला प्रकल्प सागर की पूर्णिमा मंडल की संयोजक श्रीमती पूनम मेवाती के सौजन्य से “मां दुर्गा और नारी शक्ति” – आज की नारी और शक्ति की उपासना के विशेष संदर्भ में डिजिटल परिचर्चा सम्पन्न

भारतीय शिक्षण मंडल महिला प्रथम महाकौशल प्रांत की पूर्णिमा मंडल की संयोजक श्रीमती पूनम मेवाती के सौजन्य से मां दुर्गा और नारी शक्ति विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया।ध्येय वाक्य -श्रीमती आराधना रावत, ध्येय मंत्र- श्रीमती प्रीति शर्मा , संगठन गीत- सुश्री उषा बर्मन , सरस्वती वंदना -श्रीमती मोनिका पड़ेले द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ सुधा गुप्ता जी ने कहा कि स्त्री को स्त्री रहने दें। देवी ना बनाएं अब वह देवी बनने के छलावे से बाहर निकल चुकी है। वह मानव है, बस उसे सम्मान चाहिए ।वह आज अपने अधिकारों के प्रति सम्मान के प्रति जागरूक होकर कहती है, जाग उठो चुप ना बैठो ,आंधियों सी अब चलो .चीर दो पत्थर का सीना.आंधियों सी बह चलो । प्रोफेसर डॉ. सरोज गुप्ता ने कहा कि नारी मात्र देहयष्टि नहीं है वह शक्ति स्वरूपा है। जगत की प्रेरणा ,सृष्टा , भविष्य का आधार है। आज भी शक्ति का शाश्वत परम्परागत रूप सम्पूर्ण विश्व में आज भी परिव्याप्त है। वर्तमान समय में सभी मातृशक्तियों को समाज व राष्ट्रहित में श्रेष्ठ वातावरण के लिए कार्य करने की आवश्यकता है। मुख्य वक्ता डॉ उषा मिश्रा ने कहा कि स्व परिवर्तन से सृष्टि परिवर्तन का आह्वान और क्रियान्वयन ही दुर्गा शक्ति का नारी शक्ति से संवहन का मूल उद्देश्य है और यही आज की आवश्यकता है।
श्रीमती शैलबाला ने कविता द्वारा विचार व्यक्त किए- कोमल है कमजोर नहीं ,शक्ति का नाम नारी है । जग को जीवन देने वाली, मौत भी तो उसे हारी है। नारी के बिना इस संसार की कल्पना अधूरी है।डॉ प्रीति शर्मा द्वारा नवरात्रि सिर्फ पूजा और अनुष्ठान का पर्व ही नहीं है बल्कि नारी सशक्तिकरण को सेलिब्रेट करने का अवसर भी है मां दुर्गा उनके नौ रूपों की अपार शक्ति नारी सशक्तिकरण का प्रतीक है।श्रीमती रूपा राजवाड़ा संपूर्ण ब्रह्मांड के रज रज में जिस ऊर्जा का संचार है वह स्त्री रूपा है। नवरात का त्यौहार हमें हर साल इस बात का स्मरण कराता है यह मात्र त्योहार या पूजा नहीं है बल्कि नारी शक्ति की महत्ता समझने का अवसर है मां दुर्गा के नव रूप स्त्री के 9 कलाओं की परिचायक है। श्रीमती मोनिका पड़ेले के द्वारा कलयुग की नारी में दुर्गा मां के सभी अवतार देखने को मिलते हैं आज की नारी अन्नपूर्णा भी है सरस्वती का रूप भी है लक्ष्मी के कर्तव्य भी निभाती हैं और समय पड़ने पर मां काली का रूप भी लेती है और दुष्टों का संहार करती है।
श्रीमती पूजा केशरवानी द्वारा जो स्त्री का प्रतीक है शक्ति कहलाती है उनकी पूजा की जाती है जीवन के समस्त दुखों पापों अंधेरों का नाश इसमें खुशी और सौंदर्य के रूप में नव ऊर्जा का संचार करती है। श्रीमती शशि दीक्षित द्वारा दुर्गा मां और नारी दोनों ही शक्ति स्वरूपा एक है नारी ही दुर्गा और दुर्गा ही नारी है। सुनीता जैन द्वारा शक्ति के रूप में हम सब देवी दुर्गा की पूजन करते हैं परंतु घर की महिलाओं का हम तिरस्कार करते रहते हैं सच्ची पूजा उनका सम्मान करना है।श्रीमती नीलू केशरवानी द्वारा आज की नारी का सफर चुनौतियों भरा जरूर है पर आज उसमें चुनौतियों से लड़ने का साहस आ गया है अपने आत्मविश्वास के बल पर वह दुनिया में अलग अलग पहचान बना रही है।अनुराधा राठी द्वारा कहा गया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा है कि एक राष्ट्र हमेशा ही अपने यहां की महिलाओं से सशक्त बनता है वह मां, बहन एवं पत्नी की भूमिकाओं में अपने नागरिकों का पालन पोषण करती है।श्रीमती पुष्पलता पांडे द्वारा कविता के माध्यम से देवी दुर्गा के नौ रूप 9 कलाओं का परिचायक है हर रूप की अलग अलग कहानी है हर रूप प्रेरणादाई है। माधुरी राजपूत द्वारा स्वाभिमानी हूं आत्मनिर्भर भी हूं मैं टूट के बिखरूं अब वह दौर नहीं । सशक्त हूं साकार भी हूं मैं नारी हूं कमजोर नहीं।
उषा बर्मन द्वारा बहुत ही मधुर देवी गीत प्रस्तुत किया गया श्रीमती प्रीति केशरवानी ने कहा कि नारी अपने हौसलों से भर रही है उड़ान, ना कोई आराम ना कोई थकान। एवं परिचर्चा में नीता प्रीति केशरवानी, गायत्री ,लक्ष्मी गुप्ता आदि महिलाओं ने भाग लिया। मंच संचालन श्रीमती आराधना रावत जी द्वारा किया गया एवं अंत में पूर्णिमा मंडल की संयोजक श्रीमती पूनम मेवाती जी द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।इस अवसर पर भारतीय शिक्षण मंडल महाकौशल प्रांत महिला प्रकल्प की मातृशक्तियों ने सहभागिता की तथा कार्यक्रम को सफल बनाया।

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