धरोहर : भोजपुरी संस्कार गीत जेवनार – श्रीमती सरोजिनी सिन्हा रांची

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भोजपुरी संस्कार गीत

जेवनार

जब ही गोपाल चले, मधुवन के घर
घर आंगन न सोहायी जी।
सोने की चौकी गंगा जल पानी,
चरण पखारू नौवा से बरिया जी ।
दाल भात, मैदा की रोटी. परवल की तरकारी जी। जबहीं गोपाल जी जेवन बइठलन पारे सखी सब गारी जी।

हम तो हई तीनों लोक के ठाकुर हमरा के कइसन गारी जी। जब रउरा हईं तीनों लोक के ठाकुर काहें के अइले ससुरारी जी।
पारी सखी सब हमरा के गारी, हम लेबो पटका पसारी जी।

माई अलारी पूछे, बहिनी दुलारी पूछे कहहु ललन कुशलाई जी कह बबुआ साँस कशलाई जी । साली सरस, अधिक प्यारी जी, सास गंगा जल पानी जी।

नौ महीना कृष्ण एही कोखी रहले, कबहूं ना कइले बड़ाई जी। तोहरे दोहाई अम्मा नंद बाबा के, अब ना जाइब ससुराई जी ।
जुग जुग बाढ़ो बबुआ तेरी ससुरारी, नित आव, नित जाईं जी ।

जब ही गोपाल चले मधुवन के घर घर आंगन न सोहायी जी ।।

श्रीमती सरोजिनी सिन्हा
रांची।

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