न्यायालयों के भारतीयकरण विषय पर संगोष्ठी आयोजित

न्यायालयों के भारतीयकरण विषय पर संगोष्ठी आयोजित

दिल्ली।
बी के कृष्ण मैनन सभागार सर्वोच्च न्यायालय में एक भौतिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका विषय था भारतीय न्यायालयों का भारतीयकरण रहा।
गोष्ठी में माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री एनवी रमन्ना द्वारा एक कार्यक्रम में दिए गए उनके उद्बोधन के परिप्रेक्ष्य में था जिसमें उन्होंने न्यायप्रणाली के भारतीयकरण की बात पर विशेष बल दिया है।
भारतीय भाषा अभियान भारत में सर्वोच्च न्यायालय से लेकर सभी राज्यों के उच्च न्यायालयों, जनपद न्यायालय तहसील न्यायालयों, न्यायिक अधिकरणों में भारतीय भाषाओं में कामकाज कराने के लिए विगत कई वर्षों से प्रयासरत है यह कार्यक्रम उसी कड़ी का एक हिस्सा है भारतीय भाषा अभियान के इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय श्री एसएन ढींगरा न्यायाधीश दिल्ली उच्च न्यायालय, विशिष्ट अतिथि मनन कुमार मिश्र, अध्यक्ष भारतीय विधिज्ञ परिषद, श्री आलोक कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष विश्व हिंदू परिषद तथा शिक्षाविद श्री अतुल भाई कोठारी मुख्य वक्ता के रूप में रहे कार्यक्रम का संचालन डॉ पंकज कुमार द्विवेदी धन्यवाद ज्ञापन श्री अनिल देवलाल अधिवक्ता दिल्ली उच्च न्यायालय ने किया।
अधिवक्ता परिषद के राष्ट्रीय महासचिव श्री डी भरत, दिल्ली के अध्यक्ष श्री जीतेश श्रीवास्तव, सर्वोच्च न्यायालय मंत्री श्री पट्टाभिराम, श्री चेतन शर्मा, अतिरिक्त महाधिवक्ता भारत सरकार दिल्ली उच्च न्यायालय सहित अनेकों गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता किया।
कार्यक्रम का संयोजन श्रीमान कामेश्वर नाथ मिश्र राष्ट्रीय संयोजक भारतीय भाषा अभियान, श्री राघवेंद्र शुक्ल, अधिवक्ता सर्वोच्च न्यायालय, श्री अनिल देवलाल, श्री कृष्ण कुमार शर्मा, श्री सुंदर सिंह, सुश्री प्रिया थामस, श्री हीरा लाल झा, श्री भगवान स्वरूप शुक्ल, श्री चंद्र मोहन अग्रवाल, श्री विकास कुमार पाराशर, श्री अक्षय भारद्वाज, श्री जगरूप बाबू, श्री करुणेश शुक्ला, डॉ रितु भारद्वाज सीमा पटनाहा, दिनेश रतन भारद्वाज, मीमांसा भारद्वाज श्री शुभम, अतिथि के रूप में पश्चिमी दिल्ली आरडब्ल्यूएस काउंसिल के पदाधिकारी गण श्री रामप्रसाद बोरा श्रीमती यशोदा सिंह श्री प्रेम राय श्री शैलेंद्र कटारिया श्री नरेश चोपड़ा आज भी उपस्थित रहे इसके अतिरिक्त सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली उच्च न्यायालय तथा दिल्ली के सभी जनपद न्यायालयों से बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में न्याय प्रणाली के भारतीय करण पर विशेष रुप से अपने वक्तव्य रखा और कहा कि देश में सभी न्यायालयों की भाषा भारतीय होनी चाहिए जिससे निश्चित रूप से और सही मायने में जनता को जनता की भाषा में न्याय मिल सके।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन सरस्वती वंदना से किया गया तथा समापन राष्ट्रगान से हुआ कार्यक्रम में अतिथियों का सम्मान अंग वस्त्र गीता की पुस्तक एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर कर किया गया।
इस अवसर पर भारतीय भाषा अभियान में न्याय भाषा मंथन नाम से एक पत्रिका का विमोचन भी किया जिसके संपादन मंडल, अनिल देवलाल, डॉ पंकज द्विवेदी एवं संकलनकर्ता राघवेंद्र शुक्ला ने किया।