पाठक मंच की मासिक गोष्ठी में हुई पुस्तक “मैं आर्यपुत्र हूं” पर गहन चर्चा

260

मनुष्य संस्कारों से संस्कारित होकर आर्य बनता है-डॉ. लक्ष्मी पाण्डेय

पाठक मंच की मासिक गोष्ठी में हुई पुस्तक “मैं आर्यपुत्र हूं” पर गहन चर्चा

सागर।
साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद सागर इकाई की द्वितीय समीक्षा गोष्ठी का आयोजन रविवार को जेजे इंस्टीट्यूट सिविल लाइंस में आयोजित हुआ। इस अवसर पर लेखक मनोज सिंह की पुस्तक ” मैंआर्यपुत्र हूं”‌ पर विस्तृत एवं प्रभावी समीक्षा करते हुए विदुषी वक्ता डॉ.लक्ष्मी पांडेय ने कहा भारत में आर्य संस्कृति का जन्म हुआ। प्राचीन भारत अपनी विस्तृत सीमाओं के साथ आर्यावर्त कहलाता था। आर्यावर्त यानी आर्यों से घिरा – भरा क्षेत्र। आर्यों का निवास स्थान। “आर्य‌” की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा आर्य होते नहीं बनते हैं। मनुष्य संस्कारों से संस्कारित होकर आर्य बनता है। आर्य का अर्थ होता है – सभ्य,सुसंस्कृत श्रेष्ठ मनुष्य। जो संवेदनशील, कर्मठ, आत्म सम्मान तथा विवेक से पूर्ण चेतनावान और आर्ष अर्थात ऋषियों के द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने वाला होता है। महाविष्णु ने बार-बार इसी आर्यावर्त में अलग-अलग भूभागों पर अवतार लेकर अलग-अलग प्रयोजन सिद्ध किए और अपनी लीलाओं से मानव सभ्यता तथा संस्कृति के विकास और परिष्कार का मार्ग प्रशस्त किया। मनुष्य को ‘आर्य’ बनने की दिशा और शिक्षा दी। इसलिए भारत देवभूमि है, आर्यों की भूमि है। हम आर्यों की संतानें हैं। भारत विश्वगुरु भी इसलिए कहलाता है कि आर्य बनने की शिक्षा का प्रसार इसी भूमि से चारों दिशाओं में हुआ। बाहर से आक्रमणकारी और पर्यटक यहां आए और आर्य संस्कृति से प्रभावित होकर यहीं बस गए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध गायक व लोक-संस्कृतिविद् शिवरतन यादव ने पाठक मंच की कोरोना काल के पश्चात हुई इस द्वितीय गोष्ठी की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और इतिहास की वास्तविक जानकारी देने वाली ‌पुस्तकों पर चर्चा से ज्ञान प्राप्त होता है।
वरिष्ठ गांधीवादी चिंतक शुकदेव प्रसाद तिवारी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में आर्यावर्त के विस्तृत भू-भाग की चर्चा करते हुए विभिन्न नदियों, पर्वतों के पौराणिक महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती पूजन से हुआ। कवि पूरन सिंह राजपूत ने स्वरचित सरस्वती वंदना का सस्वर पाठ किया। मंचासीन अतिथियों का स्वागत पुस्तक तथा मास्क एवं पुष्प भेंट से किया साथ ही उन्हें प्रशंसा पत्र भी प्रदत्त किए। पाठक मंच के केंद्र संयोजक आर के तिवारी ने स्वागत उद्बोधन, कार्यक्रम तथा लेखक का परिचय दिया।
संचालन श्यामलम् ‌अध्यक्ष उमाकांत मिश्र व महिला काव्य मंच अध्यक्ष ‌डॉ.अंजना चतुर्वेदी तिवारी ने किया। स्वर संगम समिति अध्यक्ष ‌हरीसिंह ठाकुर ने आभार प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर डॉ. सुरेश आचार्य,डॉ. चंचला दवे, मुन्ना शुक्ला, रमेश दुबे,वीरेंद्र प्रधान, आशीष ज्योतिषी, उदय खेर, जे.एल. राठौर प्रभाकर, ज्योति विश्वकर्मा, हरि शुक्ला,कपिल बैसाखिया, डॉ विनोद तिवारी, डॉ.आर.आर.पांडेय,डॉ.ऋषभ भारद्वाज, डॉ.बी डी पाठक, डॉ. नलिन जैन, राहुल दुबे एवं शुभम तिवारी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here