काव्य भाषा : ग़ज़ल – अनिरुद्ध कुमार सिंह धनबाद, झारखंड

385

ग़ज़ल
(१)
कदम प्यार में लड़खड़ाता किसीका
कहाँ साथ कोई निभाता किसीका
(२)
मजा लोग लेते गलत लब बयानी
नहीं बात दिलको सुहाता किसीका
(३)
तड़पता फिरे सब लुटा आज हारा
सदा प्यार दिलको रुलाता किसीका
(४)
बता कौन सोंचे वफा बेवफाई
तड़प बेकरारी सताता किसीका
(५)
जहाँ आशिकी को खिलौना समझता
उसे क्या पता दिल दुखाता किसीका
(६)
बड़ी बेरहम आदमी सब यहाँ के
कहाँ बात कोई छुपाता किसीका
(७)
बता’अनि’ कहे क्या नजर को चुराये
किसी को पता क्यों बताता किसीका

अनिरुद्ध कुमार सिंह
धनबाद, झारखंड

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here