धरोहर : भोजपुरी संस्कार गीत मंगल – श्रीमती सरोजिनी सिन्हा रांची, झारखंड

धरोहर भोजपुरी संस्कार गीत

मंगल

साजी बरात चलले राजा दशरथ,
जनक रीखइआ के दुआर ए।

आरी झारी पीतांबर जनक जी बिछवले,
बइठस दशरथ राम ए ।

आरे सोने के थाली में रत्न जड़ावल,
हीरा मोती भरेला थाली।

आरे परीछे बाहर भइली सासु मदागीन
धीर नाही रहेला ग्यान ए।

आरे कौन राम, कवन लछुमन,
आरे कौन भाई के हवे भरत भुआल ए।

आरे केकर ही माथे मौर भला शोभे
केकर आरती उतारीं।

अरे सावर राम,गोरे भइया लछुमन
गोरे ही भरत भुआल।

आरे राम के माथे मटुक माला शोभे
राम जी के आरती उतारीं।।

श्रीमती सरोजिनी सिन्हा
रांची, झारखंड।