जो भूर्ण हत्याएं करवाएगा उसकी दुर्गति कंस जैसी होगी- श्री श्री 1008 राम कृष्णाचार्य जी महाराज

श्रीनिवास मंडपम में चतुर्थ दिवस की श्रीमद् भागवत कथा भगवान श्री कृष्ण का प्राकट्य

जो भूर्ण हत्याएं करवाएगा उसकी दुर्गति कंस जैसी होगी- श्री श्री 1008 राम कृष्णाचार्य जी महाराज

इटारसी 11 सितंबर बैंक कॉलोनी स्थित श्रीनिवास मंडपम श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस देश के जाने माने भागवताचार्य श्री श्री 1008 राम कृष्णाचार्य जी स्वामी ने श्रीमद्भागवत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब जब पृथ्वी पर असुरों का आतंक पड़ता है तब प्रभु किसी न किसी रूप में अवतरित होते हैं त्रेता युग में प्रभु श्री राम के रूप में चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ के यहां जन्म लिया और द्वापर युग में योगेश्वर श्रीकृष्ण ने वासुदेव और देवकी के यहां जन्म लेकर नंद और यशोदा के यहां पहुंचे और वहां पर लीलाएं की भगवान श्री कृष्ण के जन्म का महोत्सव श्रीनिवास मंडपम में धूमधाम से मनाया गया श्री श्री 1008 स्वामी रामकृष्णाचार्य ने कहा कि वामन अवतार मैं भगवान ने राजा बलि को संदेश दिया धर्म का मार्ग बताया देवताओं के लोक उन्हें वापिस दिए गए पूज्य महाराज जी ने कहा भगवान की बात ना मानने वाले जीवन भर सुख पाते हैं और भगवान से संबंध यदि बनाना हो तो सीधे-सीधे बनाया जा सकता है उन्होंने कहा कि आप अपने लिए नहीं परंतु लोकमंगल के लिए भगवान की सेवा करो उनकी सेवा निष्काम भाव से होनी चाहिए और उनकी शरणागति में जो भी बाधाएं होती है हे भगवान स्वयं दूर करते हैं श्री राम कृष्णाचार्य ने कहा कि जीवन में घर में माता पिता गुरु होते हैं और सांसारिक जीवन में सांसारिक जीवन में सद्गुरु ही सन्मार्ग बताते हैं उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस घोर कलयुग में जो केवल कली का शेष अकाल चल रहा है इसमें कई गुरु ऐसे भी है जिन से समाज को सचेत रहना पड़ता है भगवान की सेवा में और गुरु के अर्पण में स्वाभिमान श्रद्धा और समर्पण हो सकता है लेकिन अहंकार नहीं हो सकता उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान की सेवा करो लेकिन उनसे कुछ अपेक्षा मत करो आचार्य श्री रामकृष्णाचार्य ने कहा कि सूर्य वंश में भगवान श्री राम पैदा हुए जो दशरथ नंदन कहलाए और श्री राम जन्म से लेकर रावण वध तक की कथा उन्होंने संक्षेप में बताते हुए कहा भक्तों की रक्षा करने और दुष्टों के संहार के लिए प्रभु लेते सा युग में जन्म लिया था और अपनी लीला पूरी करके वह अपने धाम पधार गए थे द्वापर में भगवान श्री कृष्ण देवकी और वसुदेव के यहां पधारे कंस का आतंक मथुरा और आसपास के क्षेत्र में बहुत था। भगवान ने लीलाएं करके कंस का वध करने के लिए जन्म लिया। कंस राक्षसी प्रवृत्ति का था एक-एक करके उसने देवकी कि 6 संतानों का वध किया श्री रामकृष्णाचार्य ने कहा कि भ्रूण हत्या करना पाप है और वर्तमान में जो भूण हत्या करते हैं वेट कंस के समान पापी हैं और होली की दुर्गति कंश जैसी होगी। भगवान श्री कृष्ण का जन्म महोत्सव श्रीनिवास मंडपम में धूमधाम से मनाया गया आकर्षक झांकी भी प्रस्तुत की गई और बधाई भी दी गई।