काव्य भाषा : सार्थक सोच – रानी पांडेय, रायगढ़ छत्तीसगढ

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सार्थक सोच

सार्थक सोच है
जीवन की एक कला।
सोच से खोज तक,
लगा है साघनो का मेला,
ब्रह्मांड आंखो मे,
धरती बांहो मे खेली,
इस सोच के गर्भ मे,
महान हस्तियाँ है पली,
इसकी सीढी पर चढ के,
मिली कई मंजिले अलबेली,
मृत्यु पर विजय की कोशिश,
आंशिक सफलता की लाली,
साहित्य, विज्ञान, दर्शन आदि
सभी इस दरख्त के डाली,
इंसान बन गया विधाता सा,
जीवन एक उलझी -सुलझी
पहेली,भविष्य के आईने मे
क्या- क्या रूप दिखाए बावली,
बन गयी जीवन की धुरी ,
क्योंकि सार्थक सोच है,
जीवन की एक कला ।

रानी पांडेय,
रायगढ़ छत्तीसगढ

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