कवि निर्मल जी को दी गई श्रद्धांजली : निर्मल जी के साथ हिंदी कविता के एक युग की समाप्ति हुई है – डॉ.सीरोठिया

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निर्मल जी के साथ हिंदी कविता के एक युग की समाप्ति हुई है – डॉ.सीरोठिया

कवि निर्मल जी को दी गई श्रद्धांजली

सागर।
वरिष्ठ कवि व साहित्यकार निर्मल चंद जी निर्मल के निधन पर सोमवार को वर्णी भवन मोराजी में‌ श्रद्धांजली सभा का आयोजन किया गया। प्रारंभ‌ में निर्मल जी के चित्र पर उनके पुत्र इं.नवनीत एवं‌ नलिन तथा परिजनों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलन किया गया। संचालन करते हुए मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन सागर के अध्यक्ष आशीष ज्योतिषी ने स्व. निर्मल जी को राष्ट्रीय चेतना का कवि निरूपित करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। लोक गायक शिवरतन यादव ने निर्मल जी की कविता का स्मृति- गायन किया।‌ वरिष्ठ गीतकार, आईएमए के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. श्याम मनोहर सीरोठिया ने अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि‌ यथा नाम तथा गुण को मन, वचन, कर्म से चरितार्थ करने वाले संत स्वभाव के रचनाकार‌ निर्मल जी भाव,भाषा और शब्द के अद्भुत एवं अनुपम शिल्पी थे। निर्मल जी साहित्य की सभी विधाओं के सिद्ध साधक थे, उनका जाना हिंदी कविता के एक युग की समाप्ति है।
मोराजी‌ ट्रस्ट के मंत्री डॉ.के.के.सराफ ने श्रद्धांजली अर्पित करते हुए उन्हें प्रेम पूर्ण व्यक्ति बताया। प्रख्यात उपन्यासकार डॉ.सुश्री शरद सिंह ने कहा कि निर्मल जी का पितृवत स्नेह सुख-दुख में सदैव संबल देता रहा।‌ ढोलक परिवार के डा.जवाहर जैन कहा कि निर्मल जी मेरे आदर्श पुरुष रहे हैं। शैक्षणिक जीवन में उन्होंने कीर्तिमान स्थापित किए हैं। श्यामलम् संस्था के अध्यक्ष उमा कान्त मिश्र ने कहा कि निर्मल जी का सान्निध्य सुखानुभूति देता था। वे सर्वप्रिय रचनाकार थे।
महिला काव्य मंच सागर की अध्यक्ष डॉ. अंजना चतुर्वेदी ने श्रद्धाजंलि देते हुए कहा कि निर्मल जी की पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम का संचालन करते हुए मुझे उनके विराट व्यक्तित्व से परिचित होने का सौभाग्य मिला था। महिला लेखिका संघ की‌अध्यक्ष
सुनीला सराफ ने संस्मरण साझा किए।
साहित्यकार‌ डॉ.महेश तिवारी ने कहा नियति के चक्र के सामने पुरुषार्थ के रथ का पहिया रुक जाता है। निर्मल जी का विछोह भी ऐसी ही दुखद घटना है। संदीप श्रीवास्तव ने कहा साहित्य के महासागर में निर्मल जी ने अपनी शब्द शैली से जो तरंगें उत्पन्न की हैं वह चिरकाल तक प्रभावित करती रहेंगी। निर्मल जी रूपी दीप अस्त अवश्य हुआ है परंतु उनकी साहित्यिक उपलब्धियों से साहित्य जगत सदैव दीप्तिमान होता रहेगा।
कवयित्री डॉ.चंचला दवे,देवी सिंह राजपूत, प्रभात कटारे, बिहारी सागर ने‌ काव्यांजली दी।‌ पाठक मंच संयोजक आर.के.तिवारी, कपिल बैसाखिया,पी आर मलैया,एम डी त्रिपाठी, शुभ कुमार जैन, ईश्वर चंद जैन (उड़ीसा), राजेंद्र जैन सुमन, अजय सराफ, श्रीराम सेवा समिति से डॉ. विनोद तिवारी, संध्या भार्गव व श्याम सोनी ने भी अपने भाव‌‌ अभिव्यक्त किए। श्रद्धांजली अर्पित करने वालों में सेठ सुरेश जैन, उदय चंद जैन, आनंद जैन ढोलक, भोलेश्वर तिवारी, हरगोविंद विश्व, डॉ. गजाधर सागर, डॉ.अनिल जैन, वीरेंद्र प्रधान, निरंजना जैन,शिखरचंद शिखर, पुष्पदंत हितकर, रमेश दुबे, डॉ. ऋषभ भारद्वाज, दिनेश कुमार जैन,डॉ.आर के जैन, विमल कुमार जैन, महेश कुमार जैन, डॉ. दिनेश सिंघई, सुरेंद्र कुमार जैन,डॉ. संतोष साहू, डॉ. आर के गर्ग, डॉ. रश्मि गर्ग, पूरन सिंह राजपूत, सुनील भाई पटेल, हेम चंद जैन, डॉ.अमर जैन, डॉ. स्वाति श्रीवास्तव, ऋषभ जैन, यशवंत जैन, रज्जन अग्रवाल, ज्ञानचंद जैन, सुनील जी देव,राधिका प्रसाद गौतम,दामोदर प्रजापति, पैट्रिस फुस्केले, नम्रता फुस्केले, भगवानदास रैकवार, राजेश पंडित, ओ.पी. रिछारिया, मनीष गंगेले, दीपक अग्रवाल सहित विभिन्न
से आए हुए उनके चाहने वालों ने भी बड़ी संख्या में उपस्थित होकर श्रद्धांजली व्यक्त की।समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर एवं डॉ. सुरेश आचार्य ने शोक संदेश के माध्यम ‌से श्रद्धांजली अर्पित की।
निर्मल चंद निर्मल जी के कनिष्ठ पुत्र नलिन जैन ने उपस्थित सभी आत्मीयजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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