काव्य भाषा : जन्म लेते ही कृष्ण के – प्रीति कुमारी रांची झारखंड

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जन्म लेते ही कृष्ण के

वृंदावन की गलियों में
अभी भी तेरा नाम है
और वहां के संतों में तेरा ही गुणगान है…
और इस पूरे संसार में
प्रभु तुम्हारा स्थान है…
तुम्हारे जन्म लेते ही
वासुदेव की बेड़ियां हाथों से खुल गई….
सारे दुख सारे विलाप उनकी उस वक्त ही अंत हो गई..
नंद के घर आनंद की जब खुशियां मनने लगी
तुझको देखने की सबके मन में इच्छा तब जगने लगी….
तुम्हारी हाथों जब प्रभु कंस का अंत हुआ…
बुराई और अहंकार की अग्नि सी जलने लगी…
गोपियों में प्रेम और स्नेह की भाव तब भरने लगी…
सुदामा की भक्ति तरक्की सी करने लगी..
उद्धव की सारी ज्ञान की बातें प्रेम में बदलने लगी..
प्रभु जब तुम्हारा जन्म हुआ
बादल भी खुशी से गरजने लगी..
अपने भाव को वर्षा में बदलने लगी…
और खुशियों की बरसात होने लगी।

प्रीति कुमारी
रांची झारखंड

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