जन्माष्टमी पर विशेष लेख : श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन और इसका औचित्य -राजीव कुमार झा, इंद्रपुर,बिहार

जन्माष्टमी पर विशेष लेख :

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन और इसका औचित्य

श्रीकृष्ण पौराणिक चरित्र हैं और धार्मिक ग्रंथ आस्था के प्रतीक हैं . इनकी व्याख्या के लौकिक संदर्भ अपनी आत्मिक चेतना से निरंतर हमें सुंदर समृद्ध जीवन का संदेश देते हैं . हमारे देश में कृष्ण इस रूप में समाज – संस्कृति और सभ्यता के सर्जक हैं . गीता में उन्होंने अर्जुन को कहा है – ‘ ‘ धर्म संस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे ‘ ‘ का संदेश देकर इस सुंदर संसार को हर युग में अधर्म और पाप से बचाने के लिए ईश्वर के अवतार की बात कही है . सदियों से उनका विराट व्यक्तित्व भारतवासियों के हृदय में बसा रहा है . राधा को कृष्ण की प्रेयसी कहा गया है . उनकी मुरली का मादक स्वर और ब्रज में बाल्यकाल का नटखटपन सबके हृदय को जीवन के अद्भुत सुख से भर देता है . जीव और ब्रह्म के संबंधों में निहित रहस्य के वह सुंदर साकार रूप हैं . मीराबाई ने कृष्ण के प्रेम में राजमहल को छोड़ दिया था .

भारतीय चिंतनधारा में गीता में कृष्ण के द्वारा प्रतिपादित कर्मयोग दर्शन को ईश्वर और लोक के समुचित संबंधों की शास्त्रीय व्याख्या कहा जाता है . कलिया मर्दन से लेकर द्रौपदी की लाज रक्षा के प्रसंगों तक वह निरंतर दीन दुखी असहाय जनों की पीड़ा के लिए निरंतर अपना सर्वस्व न्योछावर करते प्रतीत होते हैं . सूरदास और मीराबाई ने सख्य भाव से कृष्ण की उपासना अपने काव्य में की है . संस्कृत के प्रसिद्ध कवि जयदेव की कृति ‘ गीतगोविंद ‘ कृष्णभक्ति और प्रेम का महान ग्रंथ है . विद्यापति शैव मत के अनुयायी थे लेकिन उनके काव्य में राधा कृष्ण के प्रेम के श्रृंगारिक पक्ष की अद्भुत अभिव्यक्ति हुई है . कृष्ण का स्मरण मनुष्य के मन को पवित्र पावन बना देता है और जीवन के सारे पाप मिट जाते हैं – ‘ ‘ हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेवाय । ‘ ‘

मथुरा को कृष्ण की जन्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है . मुगल काल में यहाँ के कृष्ण जन्मभूमि मंदिर को औरंगजेब के तोड़फोड़ का सामना करना पड़ा था और यहाँ एक मस्जिद भी बना दी गयी . मध्यकाल के ऐसे धर्मांध शासकों की करतूतों ने भारत में इस्लाम के नाम को कलंकित किया और हिंदू धर्मावलंबी अयोध्या की तरह कृष्ण जन्मभूमि परिसर से इसे हटाने की माँग करते रहे हैं . यहाँ जन्माष्टमी के दिन कृष्ण जन्मोत्सव काफी धूमधाम से मनाया जाता है .

दुनिया में सभी धर्मों के अनुयायी अपने – अपने धर्मस्थलों की प्राण प्रतिष्ठा को सर्वोपरि समझते हैं लेकिन भारत के कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी अपने भग्न धर्मस्थलों के उद्धार की बात कहने वाले हिंदु धर्मावलंबियों को साम्प्रदायिक करार देते हैं . यह प्रवृत्ति अनुचित है और इसमें निरंकुशता की भावना का समावेश है . आइए ! अपने धर्मस्थलों के उद्धार के आंदोलन में हम आगे बढ़ें ! भगवान श्रीकृष्ण की जय हो ।

कृष्ण सांप्रदायिक सद्भाव के प्रतीक हैं और इनकी जन्मभूमि मथुरा के उद्धार को लेकर सांप्रदायिक दंगों से आंदोलनकारियों को बचना चाहिए और महात्मा गाँधी के बताए रास्ते के अनुसार अहिंसा और सत्याग्रह से अपना आंदोलन आगे बढ़ाना चाहिए .

अयोध्या विवाद की तरह मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि आंदोलन सांप्रदायिक रूप ग्रहण नहीं करे इसे लेकर उप्र के मुख्यमंत्री को सर्वदलीय बैठक बुलाना चाहिए और केद्र सरकार को मथुरा और काशी के मंदिरों के बारे में श्वेतपत्र जारी करना चाहिए .

मथुरा को कृष्ण की जन्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है . मुगल काल में यहाँ के कृष्ण जन्मभूमि मंदिर को औरंगजेब के तोड़फोड़ का सामना करना पड़ा था और यहाँ एक मस्जिद भी बना दी गयी . मध्यकाल के ऐसे धर्मांध शासकों की करतूतों ने भारत में इस्लाम के नाम को कलंकित किया और हिंदू धर्मावलंबी अयोध्या की तरह कृष्ण जन्मभूमि परिसर से इसे हटाने की माँग करते रहे हैं . यहाँ जन्माष्टमी के दिन कृष्ण जन्मोत्सव काफी धूमधाम से मनाया जाता है .

दुनिया में सभी धर्मों के अनुयायी अपने – अपने धर्मस्थलों की प्राण प्रतिष्ठा को सर्वोपरि समझते हैं लेकिन भारत के कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी अपने भग्न धर्मस्थलों के उद्धार की बात कहने वाले हिंदु धर्मावलंबियों को साम्प्रदायिक करार देते हैं . यह प्रवृत्ति अनुचित है और इसमें निरंकुशता की भावना का समावेश है . आइए ! अपने धर्मस्थलों के उद्धार के आंदोलन में हम आगे बढ़ें ! भगवान श्रीकृष्ण की जय हो ।

कृष्ण सांप्रदायिक सद्भाव के प्रतीक हैं और इनकी जन्मभूमि मथुरा के उद्धार को लेकर सांप्रदायिक दंगों से आंदोलनकारियों को बचना चाहिए और महात्मा गाँधी के बताए रास्ते के अनुसार अहिंसा और सत्याग्रह से अपना आंदोलन आगे बढ़ाना चाहिए .

अयोध्या विवाद की तरह मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि आंदोलन सांप्रदायिक रूप ग्रहण नहीं करे इसे लेकर उप्र के मुख्यमंत्री को सर्वदलीय बैठक बुलाना चाहिए और केद्र सरकार को मथुरा और काशी के मंदिरों के बारे में श्वेतपत्र जारी करना चाहिए .

मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बारे में मुसलमानों को शुरू से सब कुछ पता होना चाहिए और इनके सहयोग से ही हम कृष्ण जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र का विकास कर सकते हैं . यहाँ कृष्ण जन्मभूमि के पास स्थित मस्जिद को मुसलमानों की विजय स्मारक मानना सबकी भूल होगी . औरंगजेब के कई कारनामों से देश के हिंदू जनमानस को गहरी ठेस पहुँची थी . हिंदुओं की आहत भावनाओं को मुसलमान भलीभाँति समझते हैं और वे जानते हैं कि हिंदु तालिबान नहीं हैं और अपने पावन धर्मस्थलों की गरिमा को वापस कायम करने का उनका संघर्ष उनका लोकतांत्रिक अधिकार है .

अयोध्या के राम जन्मभूमि आंदोलन में लालकृष्ण आडवाणी ने शुरू से इसे अपने सत्ता अभियान का हिस्सा बनाया और यह आंदोलन इसलिए गहन भटकाव से गुजर कर अपनी मंजिल को पाने में सफल हुआ और मथुरा का कृष्ण जन्मभूमि आंदोलन आर एस एस के राजनीतिक अभियान से हटकर देश के हिंदुओं खासकर कृष्णभक्तों का आंदोलन बने यह जरूरी है . कृष्ण सारे देशवासियों के मनप्राण में प्रेम के प्रतीक हैं .

हमें अपने धार्मिक विमर्शों में विवाद को दूर रखना होगा और सांप्रदायिक सद्भाव को कायम रख कर लक्ष्य को पाने में अग्रसर होना होगा .

आजादी से पहले और इसके बाद हिंदुओं की जनभावना से जुड़े इन मुद्दों को लेकर उभरने वाले आंदोलनों की यह एक खास कमजोरी रही कि हमारे ऐसे आंदोलन एक धर्म समुदाय के धार्मिक हितों से जुड़े आंदोलन की जगह ज्यादातर देश में हिंदुओं के सामाजिक – राजनीतिक वर्चस्व के आंदोलन के रूप में ही बौद्धिक हलकों में देखे गये और इन पर कट्टरता का आरोप लगाया गया लेकिन कृष्ण जन्मभूमि आंदोलन समग्र देशवासियों का आंदोलन बने और यह आपसी एकता और मेल जोल के उपक्रम के तौर पर सामने आये . औरंगजेब और अकबर के फर्क को मुसलमान भलीभाँति समझते हैं .

राजीव कुमार झा,
इंद्रपुर,बिहार

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