काव्य भाषा : मेरा भारत – डॉ ब्रजभूषण मिश्र भोपाल

मेरा भारत

मानवता का, रक्षक भारत
करुणा की ,इबारत भारत
दया,प्रेम,साहस की मूर्ति
काल,अकाल,पीड़ा में भारत

सुसंस्कृत ,सहायक ,सहनशील भारत
वर्ग,धर्म,देश,विदेश न देखता भारत
शरणागत को ,रक्षक है भारत
आतंकी,शत्रु का, है भक्षक भारत

निज संस्कृति,निज सेना
व निज देश पर, है हमें अभिमान
इसकी माटी, इसके पानी ,और वन ,जन पर
ब्रज,मेरी धड़कन,और प्राण हैं कुर्बान

डॉ ब्रजभूषण मिश्र
भोपाल