तरकश : इन दिनों …- विनोद कुशवाहा,इटारसी

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इन दिनों …

– विनोद कुशवाहा

बहुत दिनों से सोच रहा था कि हमारे प्रिय अभिनेता दिलीपकुमार पर श्रद्धांजलि स्वरूप कुछ लिखूं लेकिन बात आई गई हो गई । वक़्त भी निकल गया । खैर । फिर कभी । बाद में सोचा टोक्यो ओलंपिक पर भी काफी कुछ लिखा जा सकता है परंतु अभी तो ओलंपिक खेल शुरू हुए ही हैं । उपलब्धि के नाम पर वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू का सिल्वर ही हमारे खाते में है । हॉकी की नर्सरी कहे जाने वाले भारत की पुरुष हॉकी टीम जहां कल ऑस्ट्रेलिया से 7 गोल से हारी तो वहीं दूसरी ओर एक दिन पहले महिला हॉकी टीम नीदरलैंड से 5 गोल से हारी थी । इसलिये इस सब पर अभी विवेचना का कोई अर्थ नहीं रह जाता ।

अब चलते हैं ” इटारसी में मेडिकल कॉलेज खोले जाने की मांग ” की तरफ । इस मांग का श्रेय लेने की इन दिनों होड़ मची हुई है । व्हाट्सएप ग्रुप बनाए जा रहे हैं । फेसबुक पर बकायदा कैम्पेन चलाया जा रहा है । ज्ञापन देने की लाइन भी लगी हुई है । जिले के प्रभारी मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह के होशंगाबाद आगमन के अवसर पर जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग को लेकर ज्ञापन देने का प्रयास किया तो स्थानीय पुलिस प्रशासन ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया । पूर्व गृह मंत्री काकू भाई ने पुलिस की इस हरकत की कड़ी निंदा की है ।

इटारसी में लोकमान्य तिलक तथा चन्द्र शेखर आजाद की जयंती पर ‘ श्री प्रेमशंकर दुबे स्मृति पत्रकार भवन ‘ में गुलाबदास भुम्मरकर के संयोजन में आयोजित कवि गोष्ठी उस समय विचार गोष्ठी में तब्दील हो गई जब अवनीन्द्र दुबे ने ” इटारसी में मेडिकल खोले जाने की मांग ” करते हुए अपनी कविता प्रस्तुत की । कवि गोष्ठी के समापन पर गुलाब दास भुम्मरकर ने भी ‘ इटारसी में मेडिकल कॉलेज खोले जाने की मांग ‘ पर आधारित अपना गीत प्रस्तुत किया । कवियों के मर्म को समझते हुए सिवनी मालवा , होशंगाबाद , भोपाल , झांसी आदि शहरों से आये कवियों तथा श्रोताओं ने भी ” इटारसी में मेडिकल कॉलेज खोले जाने की मांग ” का पुरजोर समर्थन किया । इस गोष्ठी का कुशल संचालन विकास उपाध्याय ने परंपरा अनुसार ही किया । फिर भी कुछ चिरकुट कवि परंपरा तोड़ते हुए अपनी कविता सुनाकर चुपचाप खिसक लिए जो उनकी आदत में शुमार है । बावजूद इसके कवि गोष्ठी बेहद सफल रही । गोष्ठी का आकर्षण महिला कवियत्री राधा मैना प्रिया रहीं जिन्होंने तरन्नुम में अपना गीत प्रस्तुत कर माहौल को एक नई गरिमा प्रदान की । उन्होंने सावित्री मौसी ( सावित्री शुक्ल निशा ) की यादें ताजा कर दीं । सावित्री मौसी मंच पर जब भी बैठती थीं तो उन के सर पर पल्ला होता था । ये हमारी परंपरा है । हमारे संस्कार हैं । यही वजह थी कि किसी कवि या श्रोता ने कभी उन पर कोई अभद्र या अश्लील कमेंट्स नहीं किये । आज भी उनका नाम पूरे देश में सम्मान के साथ लिया जाता है । राधा मैना प्रिया गोष्ठी में एकमात्र महिला कवयित्री थीं । हालांकि इस समय नगर में कम से कम आधा दर्जन महिलायें लिख रही हैं लेकिन वही खेमे बाजी आड़े आ जाती है । सो खेमेबाजी में पड़कर उन्होंने एक तरह से इस आयोजन का बहिष्कार ही किया । महिला कवयित्रियों ने तो इस गरिमामय गोष्ठी का बायकॉट किया ही कुछ अन्य तथाकथित नामचीन कवियों ने भी लोकमान्य तिलक व चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर आयोजित ऐसे पावन पुनीत आयोजन का बकायदा बहिष्कार किया जो हमारी परंपरा , हमारे संस्कार से जुड़े रहने के साथ – साथ हमारी राष्ट्रीय चेतना से भी जुड़ा हुआ कार्यक्रम था । हास्यास्पद तो यह है कि विपिन जोशी की नगरी में कुछ बाहरी कवियों ने स्वयं के नाम से संस्था बनाकर खुद को ही महिमामण्डित कर लिया है और मठाधीश बन बैठे हैं । ईश्वर उन्हें व उनके चेले – चेलियों को सद् बुद्धि दें । अंत में महाकवि गुलाबदास भुम्मरकर के साहस को सलाम जो सम्भव है कि चन्द्र शेखर आजाद की जयंती के अवसर पर आयोजित इस काव्य गोष्ठी को भविष्य में एक राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में परिणित कर दें । आमीन ।

इटारसी में मेडिकल खोले जाने की कोशिशें जरूर हो रही हैं पर जमीनी धरातल पर कुछ ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है । इस हेतु आज मुझे युवा पत्रकार सौरभ दुबे ने कुछ रचनात्मक सुझाव प्रेषित किये हैं जिन पर चिंतन किये जाने की आवश्यकता भी है । जैसे उन्होंने ‘ इटारसी में मेडिकल खोले जाने की मांग ‘ को लेकर एक विचार गोष्ठी के आयोजन का सुझाव दिया है । इस सुझाव का स्वागत् किया जाना चाहिए । जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा क्योंकि उधर नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में भी मेडिकल कॉलेज खोले जाने की मांग जोर पकड़ रही है । वहां तो इसके लिये संघर्ष समिति का भी गठन हो गया है । उल्लेखनीय है कि संघर्ष समिति की जिला इकाई ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन एस डी एम को सौंपा है । ज्ञापन देते समय पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष , उपाध्यक्ष , पार्षद , एडव्होकेट समेत कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे । चाहे सत्तारूढ़ पक्ष के हों या विपक्ष के हमारे यहां के जन प्रतिनिधि तो चुप्पी साधे हुए हैं । सब के सब मौनी बाबा बने धूनी रमाये बैठे हैं । अफसोस कि अब तो रेस्ट हाउस की खाली भूमि को नीलाम किये जाने के विरोध ने भी दम तोड़ दिया है । बस ।

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