काव्य भाषा : योगा – कुन्ना चौधरी जयपुर

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अंतराष्ट्रीय योगा दिवस पर विशेष

शारीरिक व्यायाम ही है योग ,
प्राण की साधना भी है योग …

स्वास्थ्य शरीर की माँग है योग,
जीवन के लिये अनिवार्य है योग…

खुले मन से अपनाने का नाम है योग ,
बंद आँखों से साँसों का नियंत्रण भी है योग …

जीने की कला को अवगत कराता है योग ,
जीवन को नया आयाम दिलाता है योग …..

राष्ट्र से अंतराष्ट्रीय स्तर तक प्रचलित हुआ है योग ,
फिर भी संपूर्ण विकसित नहीं हुआ है योग …

दो नयनों से दिखाई देता बाहरी योग…
मन से खुद की पहचान कराता है योग …

कुन्ना चौधरी
जयपुर

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