” ज्ञान-विज्ञान प्रकाशिनी,स्वर्ग की नदी गंगा” के महत्व पर मण्डल परिचर्चा का आयोजन

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गंगा दशहरा के पावन पर्व पर” ज्ञान-विज्ञान प्रकाशिनी,स्वर्ग की नदी गंगा” के महत्व पर मण्डल परिचर्चा का आयोजन

भारतीय शिक्षण मंडल महिला प्रकल्प महाकौशल प्रांत की सुरभि मंडल के संयोजक श्रीमती रेनू कठल के सौजन्य से गंगा दशहरा के अवसर पर भारत की नदियों में गंगा का महत्व विषय पर डिजिटल परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा का प्रारंभ ध्येय मंत्र आंचल गुप्ता , ध्येय वाक्य श्री देव कठल द्वारा व संगठन गीत विमलेश गुप्ता द्वारा प्रस्तुत किया गया। नंदिनी चौधरी ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। विषय प्रवर्तक डॉ सरोज गुप्ता ने कहा कि भारत नदियों का देश है जिसमें गंगा ज्ञान-विज्ञान प्रकाशिनी, ब्रह्ममयवारि, स्वर्गापगा, सुरसरि, हरप्रिया, विष्णुपदी, भागीरथी, जाह्नवी आदि नामों से जानी जाती है। भारतीयता की प्रतीक गंगा नदी का राष्ट्रीय और सांस्कृतिक महत्व है। पुराणों में गंगा को ब्रह्माण्ड की जलधारा कहा गया है।डॉ उषा मिश्रा ने कहा कि परमपावनी , मोक्षदायिनी , नदियों में शिरोमणि ,आस्था की प्रतीक मां गंगा का जल अमृतत्व प्रदान करता है ,जो गुण गंगा में है वह अमृत तत्व है ,यही विज्ञान है यही आध्यात्म है।श्रीमती शोभा सराफ ने कहा गंगा ऐसी कालजयी धारा है जो जन जन के संस्कारों में सदैव प्रवाहित है, राम कृष्ण हमारे भारतीय जीवन के स्पंदन है। गंगा भी हमारी संस्कृति की धड़कन है। डॉ प्रीति शर्मा के अनुसार गंगा नदी को भारत की सबसे पवित्र नदी माना जाता है। गंगाजल में बैट्रियाफोस नामक एक बैक्टीरिया पाया जाता है ,जो पानी के अंदर रासायनिक क्रियाओं से उत्पन्न होने वाले अवांछनीय पदार्थो को खाता रहता है। इससे जल की शुद्धता बनी रहती है दूसरा गंगा के पानी में गंधक की प्रचुर मात्रा मौजूद रहती है। इसीलिए भी गंगा का पानी कभी खराब नहीं होता है। रेनू कठल ने कहा भगवान शंकर के मस्तक से होकर निकली हुई गंगा सब पापों को हरने वाली और शुभ कारिणी है।पल्लवी सक्सेना ने कहा – गंगा किसी,धर्म,जाति,या वर्ग विशेष की ना होकर, पूरे भारत की अस्मिता और गौरव की पहचान बनी हुई है। राजश्री दबे ने कहा गंगे तव दर्शनात मुक्ति।गंगा नदी को जल का स्त्रोत नहीं वरन् देवी मानकर पूजा जाता हैं। कोई भी धार्मिक अनुष्ठान गंगा जल के बिना पूरा नहीं होता हैं।पूनम मेवाती कहां दुख पाप नाशिनी मां गंगा सबकी मित्र है गंगा का जल दुनिया में सबसे ज्यादा पवित्र है।स्नेह लता जैन के कहा देवों से होकर अपमानित ,सम्मानित निर्विकार सी बहती हो, गंगा तुम कितना सहती हो। आराधना रावत के अनुसार गंगा का महत्व इस बात से स्पष्ट हो जाता है,व्रिटिश सेना युद्ध के समय गंगाजल अपने साथ रखती थी,जिससे कि घायल सिपाही के घाव को धोया जाता था तथा घाव में इन्फेक्शन नहीं होता था। रजनी गुप्ता ने कहा गंगा देवात्मा हिमालय के गोमुख से स्वर्ग की वह अमृत धारा है जो अपने औषधि युक्त जल से मां वसुंधरा को ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति को हर भरा बनाकर सिंचित करती हैं ।इसीलिए सभी नदियों में मां गंगा का महत्वपूर्ण योगदान है हमारी संस्कृति में।डॉ कृष्णा गुप्ता के अनुसार युगों-युगों से कल कल करती हुई गंगा की धार के स्वर आज बदल गए हैं वह पुकार पुकार रही हैं मानव अभी जागो और मुझे प्रदूषण से मुक्त करो। मेरे जल का सही उपयोग करो। मैं आज भी पापनाशिनी मोक्षदायिनी गंगा हूं मेरे महत्व को समझो। प्रीति केसरवानी ने कहा कि बचा कर रखना गंगा को जरूरत कल भी बहुत होगी। यकीनन आने वाली पीढ़ी इतनी पाक भी नही होगी।गंगोत्री से निकलकर सबके पापों को धो कर, अपने अंदर समेटने की ताकत रखने वाली हमारी मां गंगा।रिचा शाह ने कविता के माध्यम से कहा ” हिमनद से निकली निर्मल जलधारा।
जिसने सृष्टि के कण-कण को तारा। मोक्षदायिनी, त्रिपथगामिनी,पुण्य-सलिला की स्तुति करता जग सारा।” रूपा राज के अनुसार भारत की सबसे बड़ी उत्तरायण गंगा का संगम त्रिमुहानी संगम है सामाजिक साहित्यिक सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण गंगा का यह मैदान अपनी घनी जनसंख्या के कारण भी जाना जाता है यह नदी भारत में पवित्र नदी भी मानी जाती है तथा इसकी उपासना मां तथा देवी के रूप में की जाती है। ऊषा बर्मन ने भजन गाकर गंगा की स्तुति की।गंगा मैया जब हुई अवतरित।धरती अंबर डोला। भारतीय शिक्षण मंडल महाकौशल प्रांत महिला प्रकल्प की समस्त मातृशक्तियों ने गंगा दशहरा पावन पर्व पर भारतीयता की प्रतीक मां गंगा के महत्व को, भारतीय संस्कृति की विरासत को जन-जन के समक्ष प्रस्तुत करने हेतु सभी से आह्वान किया। परिचर्चा के समापन अवसर पर आभार रेनू कठल द्वारा प्रदर्शित किया गया। हर-हर गंगे

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