काव्य भाषा : लक्ष्मीबाई – सुषमा दीक्षित शुक्ला लखनऊ

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लक्ष्मीबाई

मणिकर्णिका बन लक्ष्मिबाई
पग धरणि पर धर दिया ।

मानो स्वयं ही दुर्गमा ने ,
जन्म धरती पर लिया ।

सुघड़ता मे लक्ष्मि जैसा,
रूप प्रभु ने था दिया ।

शौर्य ,साहस शक्ति से ,
माँ शक्ति ने सजा दिया ।

मां भारती की भक्ति हित ,
थे प्राण अर्पण कर दिया ।

ये वीरता की अमिट गाथा ,
को नया दर्पण दिया ।

नारी शक्ति अटल योद्धा ,
की अमर मिसाल वह ।

क्रांति देवी रूप में थीं ,
शत्रुओं का काल वह ।

निर्बल नहीं नारी कभी ,
संदेश दुनिया को दिया ।

गौरव बढ़ाकर देश का ,
यह विश्व में साबित किया ।

सुषमा दीक्षित शुक्ला
लखनऊ

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