काव्य भाषा : चेहरा है उस पर – आर एस माथुर इंदौर

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चेहरा है उस पर

एक और चेहरा चेहरे पर
तौर यही छाया है सब पर

छोटी-छोटी बात पकड़ कर
झगड़ा बड़ा लगा है दिल पर

सुबह से लो सांझ हो गई
आता नहीं दिखा वह शब भर

दूजे के दुख से पिघला है
उसको कभी देख लो कातर

भोलापन जिसकी कमज़ोरी
सुन लो चोट खाएगा अक्सर

पाखी को हर पल खतरा है
उड़ जाने को रहता तत्पर

आर एस माथुर
इंदौर

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