विवाह,परिवार,पर्यावरण एवं समाज के बीच अंन्त:सम्बन्धों को साधने का सशक्त पर्व है वट सावित्री -डा सरोज गुप्ता,सागर

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विवाह,परिवार,पर्यावरण एवं समाज के बीच अंन्त:सम्बन्धों को साधने का सशक्त पर्व है वट सावित्री -डा सरोज गुप्ता

सागर। भारतीय शिक्षण मंडल महाकौशल प्रांत महिला प्रकल्प सागर द्वारा डिजिटल मंडल परिचर्चा “भारतीय संस्कृति में “वट सावित्री” की महिमा” संपन्न हुई।
सागर- भारतीय शिक्षण मंडल महिला प्रकल्प महाकौशल प्रांत की डिजिटल मंडल परिचर्चा अवंती मंडल की संयोजिका श्रीमती पल्लवी सक्सेना ने भारतीय संस्कृति में वट सावित्री की महिमा विषय पर परिचर्चा आयोजित की। मंच संचालन श्रीमती शशि दीक्षित द्वारा किया गया। परिचर्चा का प्रारंभ ध्येय मंत्र, आराधना रावत द्वारा किया गया। विमलेश गुप्ता जी ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी।ध्येय वाक्य श्रीमती शोभा सराफ द्वारा और संगठन गीत राजश्री दवे द्वारा प्रस्तुत किया गया। सारस्वत वक्ता डॉ. सरोज गुप्ता जी ने कहा कि वट सावित्री व्रत हर महिला के लिए संकल्पवान बनने का दिन है। वट सावित्री व्रत लौकिक जीवन में विवाह ,परिवार , पर्यावरण एवं समाज के बीच अंन्त:सम्बन्धों को साधने का सशक्त पर्व है जो दिव्य कर्म की प्रेरणा देने के साथ पति-पत्नी के मधुर सम्बन्धों,सुखी गृहस्थ जीवन एवं जीवन के चरम लक्ष्य आनन्द प्राप्ति का महत्वपूर्ण पर्व है। श्रीमती शोभा सराफ ने कहा ‘भारतीय त्योहार धर्म विज्ञान और पर्यावरण पर आधारित है। वृक्षों में प्राण वायु व प्राण स्पंदन होता है। वट सावित्री व्रत की महिमा अपार है।’ संयोजिका पल्लवी सक्सेना के अनुसार ‘भारतीय संस्कृति में वट सावित्री व्रत आदर्श नारीत्व का प्रतीक बन चुका है। वट सावित्री में “वट” और “सावित्री” दोनों का ही महत्व है’। प्रतिभा तिवारी ने कहा ‘धर्म और विज्ञान का उत्तम उदाहरण वट वृक्ष अमरता का प्रतीक है’। प्रीति शर्मा ने बताया ‘सूर्य की ऊष्मा का 27% हिस्सा बरगद का वृक्ष अवशोषित कर अपनी नमी में मिलाकर उसे पुनः आकाश में लौटा देता है जिससे बादल बनते हैं और बारिश होती है’। राजश्री दवे ने कहा ‘वट वृक्ष आस्था संग औषधीय गुणों का वृक्ष है। यह हमारा राष्ट्रीय वृक्ष भी है । श्रीमती अर्चना पाराशर ने कहा वट सावित्री द्वारा पर्यावरण को धर्म से जोड़ा गया है’। विभा श्रीवास्तव ने कहा ‘वर्तमान में परिवार और समाज को बनाए रखने के लिए सावित्री जैसी ही आत्मविश्वासी व आत्म बल से परिपूर्ण नारियों की आवश्यकता है’। स्नेह लता जैन के अनुसार ‘सनातन संस्कृति में वट सावित्री के माध्यम से परिवार और पर्यावरण के प्रति अगाध श्रद्धा का भाव व्यक्त किया गया है’। पूनम साहू ने बताया कि ‘अखंड सौभाग्य और आरोग्य के लिए वट वृक्ष की पूजा की जाती है। रजनी गुप्ता ने कहा ‘हमारी संस्कृति में नारी अर्थात सावित्री और वट वृक्ष अर्थात वनस्पति जगत दोनों का ही महत्व है’। आराधना रावत ने कविता के माध्यम से कहा – सौभाग्यवती सावित्री ने जब वर मांगा स्वयं मृत्यु से, तब अखंड सतीत्व से जीवित पुनः उनका सौभाग्य सत्यवान हुआ’। श्रीमती पूनम मेवाती ने कहा ‘इस दिन महिलाएं सोलह सिंगार करके वट वृक्ष का पूजन करती हैं और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं’। डॉक्टर कृष्णा गुप्ता ने बताया ‘वट वृक्ष की जड़ों की भांति हमारे संस्कारों की नींव भी उतनी गहराई तक समाकर विस्तृत होना चाहिए’। दिव्य मेहता ने बताया ‘इस व्रत में आध्यात्मिकता के साथ-साथ वैज्ञानिकता, सामाजिकता और संस्कारों का विशेष महत्व है’। प्रीति केशरवानी ने परिक्रमा का महत्व बताते हुए कहा- ‘ स्वास्थ्य ,प्रेम ,श्रृंगार और दीर्घायु के लिए व तेरे मेरे लिए अटूट सुंदर साथ के लिए फेरी दी जाती हैं। उषा वर्मन ने गीत के माध्यम से प्रस्तुति देते हुए कहा ‘ सखी कर लो श्रृंगार तुम्हें वट पूजन खों जानै।’ कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के साथ सम्पन्न हुआ आभार प्रदर्शन श्रीमती पल्लवी सक्सेना द्वारा किया गया। अंत में श्रीमती शोभा सराफ ने आगामी मण्डल परिचर्चाओं की सभी को जानकारी के साथ सावित्री और सत्यवान के जीवन को आत्मसात करने, पति-पत्नी में स्नेहिल मधुर व्यवहार की अपेक्षा रखने तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
इस अवसर पर भारतीय शिक्षण मंडल महाकौशल प्रांत महिला प्रकल्प की समस्त मातृशक्तियों ने अति उत्साह के साथ सहभागिता की।

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