काव्य भाषा : समझौता – श्वेता शर्मा रायपुर छत्तीसगढ़

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समझौता

एक समझौता दिया का बाती से
अंतिम चरण तक तुम जलना
हर एक घर को रौशन करना
अंधकार को सबके हरना

एक समझौता सूरज का चाँद से
जब मैं आऊँ तो तुम छिप जाना
रात में सब को शीतलता पहुँचाना
अपनी चाँदनी जग में बिखराना

एक समझौता दिन का रात से
दिन में काम से थक जाते सब
रात के आगोश में सो जाते सब
तुम सब की थकान मिटाना

एक समझौता कृष्ण का राधा से
मेरे संग मूरत में तू विराजे
तीनो लोक में तेरे प्रेम का डंका बाजे
मुँह में सबके राधा कृष्ण ही साजे

एक समझौता धूप का छाँव से
जब मैं आऊँ तब तू छिप जाना
मेरे जाते ही झट तू आ जाना
अपनी शीतल छाँव का सुख पहुँचाना

एक समझौता वर का वधू से
सातों वचन मैं निभाऊंगा
बस तू घर को स्वर्ग बनाना
अपनत्व और प्रेम बरसाना

ये सृष्टि समझौते की जननी
अनुशरण इसकी सबको है करनी।।

श्वेता शर्मा
रायपुर छत्तीसगढ़

स्वरचित

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