काव्य भाषा : पर्यावरण दिवस पर दो कविताएं -डॉ ब्रजभूषण मिश्र भोपाल

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लौटा लायें हम बहार

चलो चलें सब अब सुनें
पर्यावरण की गुहार
प्रदूषण हुआ असीम
देवें हम सब इसे सुधार

प्रकृति पर हमने किया
है सतत ही अत्याचार
आयें इसे स्वच्छ कर
लौटा लायें हम बहार

प्लास्टिक, सूखा गीला कचरा
करते पर्यावरण प्रदूषण
इनका समुचित निराकरण
कर सकते हैं शुद्धिकरण

प्लास्टिक कचरे का निबटान
लेकर आया है सुसमाचार
इनसे बनती है प्लास्टिक ईंटें
छत,और सड़कें होतीं तैयार

करें योगदान देश हित मे सब
सूखे प्लास्टिक से भरें बोतलें
प्लास्टिक बोतल हैं प्लास्टिक ईंट
सड़कें,फुटपाथ ,छत इनसे बनें सटीक

प्लास्टिक का सटीक निबटान
हो सबका अब अभियान
जन जन तक आवश्यक है
ब्रज,अब ये पहुंचना ज्ञान

2
पर्यावरण की परवाह

यह शरीर सबका बना
लिए हुए पंच तत्व
विस्मृत ना हम कभी करें
इस जीवन का सत्य

पृथ्वी,जल ,अग्नि ,वायु
और ये विस्तृत आकाश
इन्हें न हम दूषित करें
हैं यही मित्र यहाँ खास

हर सम्भव प्रयास हो
हर मानव करे इनकी रक्षा
जब तक पंच तत्व शुद्ध हैं
होगी जीवन की रक्षा

पर्यावरण की परवाह ही
हो सबके जीवन में चाह
अन्यथा, जीवाणु बीमार कर
ब्रज,भर देंगे जीवन में आह

डॉ ब्रजभूषण मिश्र
भोपाल

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