काव्य भाषा : उम्मीद पर दुनिया कायम – नीलम द्विवेदी, रायपुर

उम्मीद पर दुनिया कायम

निराशा के भँवर में डूबना मत,
उदासी की चादर ओढ़ना मत,
उम्मीद पर ये दुनिया कायम है,
हिम्मत को कभी तोड़ना मत।

आज साहिल पर पहरा बहुत,
गम का सागर भी गहरा बहुत,
खुशियों की नाव किनारे लगेगी,
भर दे पतवार में ताकत बहुत।

है उम्मीद पर कायम दुनिया,
दूर हो जाएंगी सारी कमियाँ,
रात के बाद ही होती है सुबह,
खत्म होंगी इंतजार की घड़ियाँ।

रोने के फिर से बहाने न खोज,
दर्द के दरिया में समाने न सोच,
हँसकर खिला दे गुलाब बागों में,
बढ़ते कदम पीछे हटाने न सोच।

नीलम द्विवेदी,
रायपुर, छत्तीसगढ़।

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