छंदशाला पर दो नवल छंद अर्णव सवैया और सपना सवैया का आविष्कार

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छंदशाला पर दो नवल छंद अर्णव सवैया और सपना सवैया का आविष्कार

बहुत ही हर्ष का विषय है आज वरिष्ठ साहित्यकार कलम की सुगंध छंदशाला परिवार से आदरणीया अनिता भारद्वाज अर्णव और मंच संचालिका कलम की सुगंध छंदशाला अनिता मंदिलवार सपना द्वारा नवल छंद निर्माण किया गया जो अर्णव सवैया तथा सपनि सवैया के नाम स्व जाना जाएगा ।
मंच संचालिका आदरणीया अनिता मंदिलवार सपना जी तथा समीक्षक बाबूलाल शर्मा विज्ञ, इंद्राणी साहू साँची और आज के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे आदरणीय साखी गोपाल पंडा जी सहित मंच पर विराजमान पंचपरमेश्वर की उपस्थिति ने मात्र चार घंटे चले इस सृजन कार्यक्रम में पचास से अधिक आये सवैया के छंदों के शिल्प की सधी हुई लय देख कर इन्हें छंदों में सम्मिलित करने की अनुमति प्रदान की ।
सर्वप्रथम मीडिया प्रभारी नीतू ठाकुर विदुषी ने प्रस्तावना प्रस्तुत किया मंच पर विधिवत पंच परमेश्वर विराजमान किये गए और पटल पर उपस्थित छंद मर्मज्ञों ने सहमति प्रदान किया ।

आदरणीय गुरुदेव संजय कौशिक विज्ञात जी की अध्यक्षता में, आज आ. बाबू लाल शर्मा बौहरा विज्ञ, आदरणीया इन्द्राणी साहू साँची जी, आदरणीय साखी गोपाल पंडा जी की विवेचना,समीक्षा व सहमति के आधार पर एवं पटल के सुधि छंदकारों,आ.परमजीतसिंह कोविद जी,आ.अभिलाषा चौहान जी, आ. अजय पटनायक जी, आ. आशा शुक्ला जी, आ.अर्चना पाठक निरंतर जी, आ. डाँ. एन.के. सेठी जी, आ. नीतू ठाकुर विदुषी जी, आ.इन्दु साहू जी, आ. श्रद्धांजली शुक्ला जी, आ. बिंदु प्रसाद रिद्धिमा जी,आ. धनेश्वरी सोनी गुल जी, आ. चमेली कुर्रे सुवासिता जी, आ. धनेश्वरी देवांगन धरा जी, आ. सुरेश देवांगन जी, आ. राधा तिवारी,राधेगोपाल जी एवं आ. गीता विश्वकर्मा नेह जी, डाँ. मंजुला हर्ष जी, आ.केवरा यदु मीरा जी, आ.दीक्षा चौबे जी, आ.अनुराधा चौहान जी,आ. पुष्पा गुप्ता प्रांजलि जी,आ. वाणी बरठाकुर विभा जी, धनेश्वरी सोनी गुल, आशा तिवारी की इन छंद पर रचनाओं के आधार पर आज हिन्दी साहित्य हेतु दो नवीन छंद “अर्णव सवैया” और “सपना सवैया” को सहर्ष मान्यता प्रदान की गयी।*

कलम की सुगंध छंदशाला परिवार के वरिष्ठ साहित्यकार, समीक्षक और मीडिया प्रभारी ने प्रथम सृजक गौरव सम्मान मंच पर ससम्मान प्रेषित करते हुए कहा कि मंच पर सभी सक्रिय होकर उत्तम लेखन कर रहे है । साथ हक छंद निर्माण कर्ता अनिता भारद्वाज अर्णव और अनिता मंदिलवार सपना को बधाई दिया ।
पिछले वर्ष गुरूदेव संजय कौशिक विज्ञात जी ने पहले आठ छंद और अभी एक महीने पहले एक साथ एक सौ छ: छंद पटल के रचनाकारों के उपनाम से आविष्कार किये जो अनुपम उदाहरण है हम दूसरों की खुशी में भी खुश हो सकते हैं । ऐसी भावना इस पटल पर देखी जाती है और फिर से निःसन्देह सभी सृजकों में अपनी लेखनी के प्रति हर्ष और आनंद का वातावरण बनाते हुए प्रोत्साहित कर आत्म विश्वास चरम पर देखा गया ।
अर्णव और सपना ने गुरूदेव विज्ञात जी को आभार कहा
अंत में सभी का आत्मीय आभार प्रेषित करते हुए गुरूदेव संजय कौशिक विज्ञात जी ने अर्णव और सपना जी को हार्दिक शुभकामनाएँ प्रदान की ।

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