विश्वास हमारा जीतेगा, हार कभी स्वीकार नहीं

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विश्वास हमारा जीतेगा, हार कभी स्वीकार नहीं
(अंतर्राष्ट्रीय शब्द सृजन ने श्रोताओं में जगाया विश्वास)

गाजियाबाद। साहित्य एवं संस्कृति हेतु वैश्विक स्तर और कार्यरत साहित्यिक संस्थान अंतर्राष्ट्रीय शब्द सृजन ने 30 मई को कोरोना से पीड़ित मानवता में एक विस्वास पैदा करने के लिये विस्वास हमारा जीतेगा, हार हमें स्वीकार नहीं विषय पर एक ऑनलाइन काव्य समागम किया।
अंतर्राष्ट्रीय शब्द सृजन संस्था के संस्थापक डॉ राजीव कुमार पाण्डेय ने बताया कि साहित्य हमेशा समाज का दिग्दर्शन कराता है इसी उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसे विषय को रखा गया जिससे इस महामारी के काल में हौसला बढ़ाया जा सके साथ ही कविता पाठ करते हुए कहा-
बातें करते आँख डालकर, करते नहीं कभी मनुहार।
जंग जीतने के आदी है,करते नहीं हार स्वीकार।

हार कभी स्वीकार नहीं विषय केंद्रित काव्य आयोजन की अध्यक्षता करते हुएकाठमांडू नेपाल से वरिष्ठ कवि जयप्रकाश अग्रवाल ने कहा ऐसे आयोजन हमारे अंदर सकारात्मक विचारों को बढ़ाकर ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने अपने काव्य पाठ में कहा-
विश्वास हमारा जीतेगा, हार कभी स्वीकार नहीं ।
दोष लगाना ईश्वर पर, अपना तो संस्कार नहीं।

संस्था के महासचिव दिल्ली से देश के बड़े गीतकार ओंकार त्रिपाठी के गीतों की इन पंक्तियों को सुनकर तालियां गूंजने लगी-
बाधाओं से टकरायेंगे पर,हार हमें स्वीकार नहीं।
विष पी शंकर बन जायेंगे पर हार हमें स्वीकार नहीं।

मुम्बई से वरिष्ठ गीतकार डॉ हरिदत्त गौतम अमर की इस कविता को विशेष सराहना मिली-
सूरज निकलेगा चमकेगा तम का होगा अधिकार नहीं
हम गुरु गोविंद उपासक हैं,है झुकना अंगीकार नहीं
विश्वास हमारा जीतेगा है हार हमें स्वीकार नहीं।।

संस्था की कोषाध्यक्ष अनुपमा पाण्डेय ‘भारतीय’ ने अलग अंदाज में हौसला बढ़ाते हुए पढ़ा-
सपनों को पंख दिये है गर,
तो हौसलों की उड़ान भरो।
विश्वास सदा ही जीतेगा
हार कभी ना स्वीकार करो।

फरीदाबाद से गीत ग़ज़ल के राजकुमार ब्रज माहिर के गीत ने सम्मोहन पैदा कर दिया काफी देर तक करतल ध्वनि होती रही-
ना व्यर्थ गवांए ये जीवन
हम क्या हैं जरा करें चिंतन
देवो को भी जो दुर्लभ है
हम हैं वो ही अनमोल सृजन
ना रुकें कभी, ना झुकें कभी, छोड़ें अपने अधिकार नहीं।
आओ कह दें हर मुश्किल से, है हार हमें स्वीकार नहीं।

बरेली से सरिता अग्निहोत्री ने आने मनोभावों को इस प्रकार व्यक्त किया-
संस्कृति नदिया मीठी धारा सूख रही है धीरे-धीरे ।
अंजलि अंजलि पोषित करके भर जाएगी धीरे-धीरे।

संस्था के उपाध्यक्ष मुम्बई से राजकुमार छापड़िया ने अपने तेवर कुछ इस प्रकार दिखाए-
लोहा लेंगे सारे मिलकर,
मानेंगे हम हार नहीं ।
कफ़न बाँधकर निकले घर से,
हार कभी स्वीकार नहीं ।।

पंजाब से विनय जोशी विनयचंद ने जोशीले अंदाज में पढ़ा।-
है दूर कोई तुमसे यारो,कामयाबी का संसार नहीं ।
निश्चित जीतेंगे हम, हमे हार कभी स्वीकार नहीं।।

इस अनूठे आयोजन का संचालन करते हुए दिल्ली से रजनीश स्वछंद ने कहा-
कवित्व बोध डूबती, न लेखनी थकी चली,
न ज्ञान सार भूलती, अबाध भाव है पली।
प्रमाण डाल शब्द में, नितांत भार झेलती,
थमी न जीत गीत गा, अभेद्य दुर्ग भेदती।।

अंतर्राष्ट्रीय शब्द सृजन संस्था के समीक्षक नोयडा से सोमदत्त शर्मा ‘सोम’ जब इन पंक्तियों का उच्चारण किया तो सहज ही वाह वाह होने लगी।
अरि! विस्तार व बाजार कहां?, सपने भी साकार नहीं।
क्षमा बहुत किया सदा पर अब,चले यहां व्यापार नहीं। कोरोना से ना डरें हम,वो सृष्टि सूत्रधार नहीं।
विश्वास हमारा जीतेगा,हार कभी स्वीकार नहीं।

इस अवसर पर हनुमान गढ़ राजस्थान से शंकर लाल जांगिड ने पढ़ा
हमको अब इसे हराना है,, करना हमको विश्राम नहीं।
विस्वास हमारा जीतेगा, अब हार कभी स्वीकार नहीं।

टोरंटो कनाडा से प्राची चतुर्वेदी, विराटनगर नेपाल से राधिका गुरगेन, मण्डला मध्य प्रदेश से प्रो(डॉ) शरद नारायण खरे, मैनपुरी से कैप्टेन(डॉ)ब्रह्मानन्द तिवारी ‘अवधूत’,गोरखपुर से नन्दलाल मणि त्रिपाठी, दिल्ली से कुसुमलता ‘कुसुम’,गुजरात से रेणु शर्मा,गाजियाबाद से इंजी अशोक राठौर,भिवानी से डॉ अलका शर्मा, दरभंगा बिहार से बिनोद कुमार हंसोड़ा,दिल्ली से सुनील सिन्धबाल आदि कवियों ने अपने काव्य पाठ से नई ऊंचाइयां प्रदान की।
कार्यक्रम का शुभारंभ संचालक रजनीश स्वछंद की वाणी वन्दना से हुआ।संस्था के अध्यक्ष डॉ राजीव कुमार पांडेय ने देश विदेश से उपस्थित सभी रचनाकारों का आभार प्रकट किया।

प्रेषक
डॉ राजीव पाण्डेय
संस्थापक एवं अध्यक्ष
गाजियाबाद

मोबाइल -9990650570

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