काव्य भाषा : ग़ज़ल – अदिति कपूर टंडन,आगरा

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शहर में हर तरफ़ एक ही अफसाना है ।
महफ़िल में न कोई हम जैसा परवाना है ।।

खंजर तो यूं ही बदनाम है दुनियां में ,
हमारा कातिल तो यूं तेरा शरमाना है ।

जब से खोए हैं हम इश्क के खुमार में ,
दिल का हर एहसास अब मस्ताना है ।

न कोई रंज न ही शिकवा ज़माने से जो ,
कहता है हमें कि ये तो इक ’ दीवाना ’ है ।

– अदिति कपूर टंडन
आगरा .

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