काव्य भाषा : हिंदी पत्रकारिता दिवस -सीमांचल त्रिपाठी सूरजपुर

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हिंदी पत्रकारिता दिवस

प्रजातंत्रीय देश का चौथा आधार,
उस देश के होते हैं स्वतंत्र पत्रकार ।
प्रिंट हों या हों इलेक्ट्रानिक मीडिया,
करते वे सब हैं जनता का उपकार ।।

जीवन में सुख-दुख तो आते जाते हैं,
पर पत्रकार जनता का साथ निभाते हैं ।
अपना सुख-दुख सब भूलकर वह तो,
अपना जीवन तक दाँव पर लगाते हैं ।।

सच और झूठ जानने के लिए प्रतिदिन,
अपने घर से सुबह ही निकल हैं जाते ।
गली मोहल्ले और आफिसों के रोज वे,
कई-कई बार है चक्कर रोज लगाते ।।

त्वरित घटना दुर्घटना,होनी अनहोनी,
सम-सामाजिकता और राजनीतिक ।
या हो खबर खेलकूद फिल्मी दुनिया,
या फिर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक ।।

एक दिन भी वह नही लेता अवकाश,
साल के पूरे के पूरे तीन सौ पैंसठ दिन ।
कर्म योद्धा बनकर वह तो है सबको,
जागता-जगाता रहता हर पल हर दिन ।।

बारम्बार नमन हे कलम के सिपाहियों,
आप दशा और दिशा बदल हो सकते ।
अपनी एक सशक्त आवाज पर देश की,
सीमा के नक्शा का बदलाव कर सकते ।।

हे देशद्रोहियों धर ध्यान गौर फरमाओ,
अपनी हरकत से कब तक बाज आओगे ।
बम, बारूद और बंदूक के दम पर तुम,
आम जनता को अब नही डरा पाओगे ।।

गलत राह छोड देशहित मे काम करो,
समाज की मुख्य धारा मे आ जाओगे ।
वर्ना जब कच्चा चिट्ठा लिखा तुम्हारा,
मेरे कलमकारों ने समझो मिट जाओगे ।।

शुक्र है हम प्रजातंत्रीय देश में हैं रहते,
जनता कानून जनता के लिए है बनते ।
जिस दिन सत्तापक्ष रास्ता हैं बदलते,
जनता मिल-जुल सत्ता परिवर्तन करते ।।

सीमांचल त्रिपाठी
सूरजपुर

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