काव्य भाषा : रोशनाई / स्याही – श्वेता शर्मा रायपुर

रोशनाई / स्याही

स्याही न रंगत देखे
न देखे कोई जात
जिसके हाथ आ जाये
लिखे वो दिल की बात

कोरा कागज नीली स्याही
बस इतनी सी ठाठ
जैसा तुम लिखना चाहो
लिख लो दिल की बात

छोटी हो या बड़ी तूलिका
काम एक सा करती
लिखने वाला ही थक जाए
पर वो अनवरत चलती

दिल की बात जो किसी से
कभी बोल नही पाते
कागल में लिख देते हाल
खुद हल्के हो जाते

स्याही फैली , किस्मत बदली
छोड़ तू अब ये दुनियाँ दारी
कोरे कागज पर लिखने की
कर ले तू फिर से तैयारी

स्याही न रंगत देखे
न देखे कोई जात
जिसके हाथ आ जाये
लिख ले वो दिल की बात।।

श्वेता शर्मा
रायपुर छत्तीसगढ़
स्वरचित

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