काव्य भाषा : शहर भी तो बढ़ रहा है – सजल नायक जबलपुर(म.प्र.)

शहर भी तो बढ़ रहा है

मेरी बढ़ती उम्र के साथ साथ
मेरा शहर भी तो बढ़ रहा है,
वो जिन चौराहों पर कभी पान की दुकान
और पोहे समोसे के ठेले लगा करते थे ना ,
आज वहां रंगीन एल.ई.डी. से लैस
ऊंची पूरी बिल्डिंगे , बड़े बड़े अपार्टमेंट बनकर खड़े है,
जिन पर ए.सी.पी दूर से ही उनकी पहचान बता देता है,
अपनी छत से पहले जब दूर तलक देखती थी ना,
तो खूब सारी हरियाली और,
दूर दराज़ के पहाड़ों के आकार नज़र आता था
जिनके पीछे कहीं से , रोज सूरज मुस्कुरा उग आता था,
आज भी छत तो वही है , पर नज़ारे बदल चुके है
हां कुछ पेड़ पौधे सही सलामत बचे है,
पर कब तक ये मैं भी नही जानती
क्योंकि मेरी बढ़ती उम्र के साथ साथ
मेरा शहर भी तो बढ़ रहा है,

पहले चिड़ियों का चहचहाना ,
कबूतरों का गुटरगूँ करना ,साफ सुनाई देता था
अब उनकी आवाज़े भी
गाड़ियों के हॉर्न में दब जाती है,
पहले पंछी आस पास के पेड़ों पर बैठा करते थे,
अपना घोंसला भी उन्ही पर बना लिया करते थे,
आज बड़े टावरों-होर्डिंग और ए.सी. कूलरों पर
अपना डेरा जमाने लगे है
वो असल मे उनका घर छीन लिया गया है ना ,
अब आखिर हम मतलबी इंसानों को रहने की जगह चाहिए ना,
और क्यों ना हो
मेरी बढ़ती उम्र के साथ साथ
मेरा शहर भी तो बढ़ रहा है,

याद है मुझे वो पुराना मदन महल का किला,
जो कितना साफ नजर आता था सबसे ऊपर वाली छत से
आज पता वो बस आधा सा ही धुंधला सा दिखाई पड़ता है,
वजह?
अरे ये भी कोई पूछने वाली बात है,
असल में वो बड़ी बड़ी 50-60 माले की बिल्डिंगों के पीछे छुप गया है,
और धुंधला?कुछ नहीं,
बस हमारी मोटर कारों से निकलने वाले धुएं ने,
उसे अपने अंदर समेट लिया है,
उसकी सारी सुंदरता धूमिल सी हो गयी है
पर क्या हुआ!
अब मेरी बढ़ती उम्र के साथ साथ
मेरा शहर भी तो बढ़ रहा है,

अरे मालूम है! मेरे कपड़ों के साइज के साथ,
लोगों के दिलों के साइज भी बदल गए है जनाब,
अब बड़े दिल वाले सिर्फ किस्से कहानियों में ही मिलते हैं,
असलियत में यहां तो सबका लालच और
स्वार्थ ही बढ़ा है,
अब कोई साथ रहने की बात नहीं करता,
कोई रिश्तों को ईमानदारी से थाम कर चलने की
चाह नहीं रखता,
आज पैसा कमाने की ऐसी होड़ मची है ना,
कि कोई सुकून से दो पल भी अपनों के पास नहीं बैठता;
मेरी उम्र का तो ये पड़ाव भी निकल जायेगा
पर मेरा शहर एक दिन अपनी ही पाक खूबसूरती को धीरे धीरे कर ,
खुद ही निगल जाएगा;
अब आखिर मेरी बढ़ती उम्र के साथ साथ
मेरा शहर भी तो बढ़ रहा है,
मेरा शहर भी तो बढ़ रहा है।।

~सजल नायक
जबलपुर(म.प्र.)

4 COMMENTS

  1. बढता जाता शहर
    बढता जाता कहर
    बढता जाता दिन
    मिटता नहीं जीवन से सूनापन
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति बधाई

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