काव्य भाषा : भगवान बुद्ध और कर्म – सीमांचल त्रिपाठी सूरजपुर

भगवान बुद्ध और कर्म

भगवान बुद्ध के बताए मार्ग,
पर अगर हम जो चल पाएं ।
सृष्टि बन जाए स्वर्ग से सुन्दर,
नष्ट दानवता को जो कर पाएं ।।

पंचशील के नियम अपनाकर,
शीलवान हम भी तो कहलाएं ।
हम आचार विचार शुद्ध करके,
अपना जीवन सफल बना जाएं ।।

नशा हिंसा चोरी और व्यभिचार,
का त्याग तत्काल जो कर जाएं ।
जीवन पावन कर लें हम बुद्ध सा,
पशुता का भी विनाश कर जाएं ।।

मानव मूल्यों की रख नींव हम तो,
आदर्श समाज स्थापित कर जाएं ।
सब में समता का भाव जगाकर,
सुराज सपने को साकार कर जाएं ।।

समाज मे छोदे-बडे का अंतर मेट,
सब में बराबरी का भाव भर जाएं ।
ऐसे सुदृढ़ समाज का कर निर्माण,
सुंदर समाज का निर्माण कर जाएं ।।

सीमांचल त्रिपाठी
सूरजपुर

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