काव्य भाषा : गीत -राहुल विश्वनाथ ‘ विश्व ‘ ,गोला गोकरननाथ खीरी उत्तर प्रदेश

गीत

गीत गाने के लिए रोना पड़ेगा
याद की बारिश में सोना पड़ेगा

गीत मन के भाव का उदगार है
गीत में बसता किसी का प्यार है
गीत बिन श्रृंगार लगता है अधूरा
बिन तुम्हारें गीत कैसे होगा पूरा

गीत को दिल में पुनः बोना पड़ेगा
गीत गाने के लिए रोना पड़ेगा

गीत युग-युग से मन की साधना है
गीत मेरे अब किसी की प्रार्थना है
गीत रुक जाए ना यह स्वीकार है
रुक गया जो गीत ये मेरी हार है

गीत को दिल में पुनः बोना पड़ेगा
गीत गाने के लिए रोना पड़ेगा

गीत मेरे प्रिय मुझे पहचानते है
गीत ही मन की व्यथा जानते है
गीत होंठों पर सदा चलते रहे
ये किसी के होंठ पर पलते रहे

गीत को दिल में पुनः बोना पड़ेगा
गीत गाने के लिए रोना पड़ेगा

गीत देखो विश्व को गाना सिखाते
गीत मेरे मुझको ही तन्हा है पाते
गीत सारे सौंप कर तुमकों प्रिये
चिर निद्रा में मुझे सोना पड़ेगा

गीत को दिल में पुनः बोना पड़ेगा
गीत गाने के लिए रोना पड़ेगा

राहुल विश्वनाथ ‘ विश्व ‘
गोला गोकरननाथ खीरी
उत्तर प्रदेश

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