विविध : शाम होते ही याद आ जाती है छतें -इंजी. भारतभूषण आर गाँधी

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शाम होते ही याद आ जाती है छतें

पड़ोसी देश म्यानमार के दिए हुए नाम वाला तूफान ताऊ ते हमारे मध्यप्रदेश के अन्य नगरों की तरह इटारसी को भी चाहे जब बादलों को बरसाकर तरबतर कर रहा है। बादल भी तूफ़ान की धीमी या तेज हवाओं से बरसने का छुटपुट आदेश लेकर बरस रहे हैं और बिजली विभाग को छेड़ रहे हैं। इसलिए शहरी बिजली विभाग इस हवा और बरसात से डरकर आम लोगों को खूब सता रहा है।
इन दिनों जब हर कोई कोरोना के डर से और शासन के दिशानिर्देश पर अपने अपने घरों में कैद है। हालाँकि मई का महीना चल रहा है, मौसम अभी तपन भरा नहीं है लेकिन उमस काफी है।
इसलिए लोगों को उमस से मुक्ति और ढलती हुए शाम की ठंडक का मज़ा लेने की चाहत अधिकांश लोगों को अपने घर की छत पर ले आती है। शाम होते ही दूर दूर तक घने बने मकानों की छत पर अनेक बच्चे दिखाई देने लगते हैं। छत पर आकर कुछ न कुछ करते नजर आते है। छोटे बच्चों के पीछे पीछे उनकी माँ या पिता भी साथ आ जाते हैं। कई माध्यम आयु और उछ आयु वर्ग के युगल भी छतों पर टहलते दिखाई देते हैं, साथ ही कुछ संयुक्त परिवारों के बढ़ते बच्चे इस शाम का मज़ा आपस में कुछ एक्टिविटी करते या खेलते दिखाई देते हैं। जिन जिन घरों के छत तक जाने के रास्ते हैं उन घरों से लगभग सभी उम्र के लोग शाम होते ही अपनी अपनी छतों पर निकल आते हैं। कुछ चहल कदमी करते दिखाई देते हैं और कुछ ऐसे भी हैं जो मोबाइल से चिपक कर किसी से लंबी बातें करते रहते हैं।
ये ऐसे और भी कई कारण हैं, जो लोगों को बरबस ही अपनी छतों की ओर रोज़ ही खींच लाते हैं। शाम को मस्जिदों से अज़ान की आवाज़, दूर से रेलवे ट्रैक पर गुजरती इक्का दुक्का ट्रेनों के इंजिन के हॉर्न की आवाज़, शहरी बसाहट के कारण थोड़ी बहुत आकाश में मंडराती चिड़ियों की चहचाहट भी सुनाई देती है। ऊपर से हवा में नमी के कारण फ़िज़ा में घुली हुई हुई ठंडक छत को और भी गुलजार बना देती है।

इंजी. भारतभूषण आर गाँधी
स्वतंत्र पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता

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