काव्य भाषा : अपनो को खोने का गम – श्वेता शर्मा रायपुर

अपनो को खोने का गम

एक और दुखद खबर है
ये किसके आतंक का कहर है
अब व्हाट्सएप खोलने से डर है
न जाने फिर कौन सी खबर है
हर पल हर क्षण डर लग रहता है
मौत सर पर मंडराया रहता है
एक एक कर के निकल लिए सब
इंसान कुछ नही कर पाता है
और दुर्भाग्य तो देखिए
कोई कंधा भी नही दे पाता है
कितने लाचार और बेबस हो गए है हम
दूर नही कर सकते किसी का गम
ये किसके आतंक का कहर है
ये किसके आतंक का कहर है।।

श्वेता शर्मा
सुंदरनगर ओम सोसायटी
रायपुर छत्तीसगढ़
स्वरचित

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