काव्य भाषा : माँ – मनोज कान्हे ‘शिवांश’ इंदौर

माँ 

माँ  प्रेम,करुणा और वात्सल्य की मूरत है,
माँ धरती पर ईश्वर की साक्षात सूरत है,
माँ प्रेम का आंचल है,सुरक्षा की छांव है,
माँ ममता का बहता निर्मल सा भाव है,
माँ विश्वास है,धैर्य है,ममतामयी प्यार है,
माँ जीवन है,उम्मीद है,माँ से ही संसार है,
माँ बचपन की लोरी है,मीठी सी यादें है,
कोमल सा अहसास है,,,,
माँ से हम चाहे कितना ही दूर सही,
माँ की दुवाएँ हमेशा साथ है,
माँ रोली है,कुमकुम है,मन-मन्दिर का चंदन है,,,,
माँ से ही जगत की रचना है,
माँ के चरणों मे शत शत वंदन है,,,,
माँ ही बल,माँ ही बुद्धि,
माँ ही रिश्तों को सिचती सरिता है,,,,
माँ के पावन चरणों मे समर्पित “मनोज” की ये कविता है,,,,!!!!
     @ मनोज कान्हे ‘शिवांश’
इंदौर

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here