काव्य भाषा : वो अलग बात है – कुन्ना चौधरी जयपुर

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वो अलग बात है

मानो तो जीवन में
जड़ों का ही है महत्व ,
तारीफ़ फूलों की होती है ,
वो अलग बात है….

जानों तो सहायक है
नींव की ईंटें ही ..
इमारतें इतराती हैं ,
वो अलग बात है….

संस्कार और संस्कृति
बनाती है हमें चरित्रवान …
बनावट को मिलता सम्मान
वो अलग बात है ..

जलतीं बाती तपता है नेह
दीप देता सहारा फिर भी …
कद्र रोशनी की होती है
वो अलग बात है ….

सब कुछ मिला है सृष्टि से,
उसी में विलीन हो जाना है …
मैं का अभिमान पर छूटता नहीं ,
वो अलग बात है….

कुन्ना चौधरी
जयपुर