काव्य भाषा : क्या कहे प्रकृति,तू सुन,पल पल -डॉ ब्रजभूषण मिश्र भोपाल

क्या कहे प्रकृति,तू सुन,पल पल

रात्रि ने किया विश्राम
सुबह उसे आया आराम
सूरज ले आया प्रकाश
जगमग चमक उठा आकाश

खगों ने निज पर खोले
सब अपने स्वर में बोले
नृत्य मग्न हुआ मन का मोर
दिन उगा, लो हुई भोर

सजा गगन,चली,चंचल,पवन
परबत जागे,जागे सब वन
सरिता ,बहती जाती, कल कल
मन को ,करती जाती निर्मल

ब्रज ,चल ,बैठ ,किसी वृक्ष नीचे
तूँ ,अपनी दोनों, अँखियाँ मीचे
सुन ,नीरव में,जीवन -हल चल
क्या कहे प्रकृति,तूँ, सुन, पल पल

डॉ ब्रजभूषण मिश्र
भोपाल