नागरिक पत्रकारिता : बल बुद्धि विद्या मांग कर क्या करोगे जब ..इंजी. भारतभूषण आर गाँधी

बल बुद्धि विद्या मांग कर क्या करोगे जब ..

राम भक्त भगवान् हनुमान जी का जन्मदिवस पर सभी हनुमान भक्त उन्हीं की तरह बल बुद्धि विद्या की कामना अपने आराध्य से करते हैं. सभी देसी अखाड़ों में हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति जरुर होती है. इन अखाड़ों के प्रशिक्षक और प्रशिक्षु भी शारीरिक सौष्ठव का प्रतीक हनुमान जी को मानते हैं. हनुमान जी को मानने वाले हनुमान चालीसा का पथ भी पूरी भक्तिभाव के साथ किया करते है. लेकिन क्या हनुमान भक्त उनसे आशीर्वाद के रूप में मिलने वाली ramramशक्तियों बल, बुद्धि या विद्या का सही इस्तेमाल करना जानते हैं या किया करते हैं, ये सवाल आज की परिस्थियों में प्रासंगिक लगता है.
हनुमान जयंती पर इटारसी के लगभग छोटे बड़े मंदिरों सहित अन्य मंदिरों में पूजन और प्रसाद का आयोजन हुआ, प्रशासन को इन मंदिरों में आकर हनुमान जी में आ रहे दर्शनार्थियों को वापस घर जाने और इन मंदिरों के अन्दर बैठे पुजारी व मंदिर से जुड़े लोगों को मंदिर के द्वारों को बंद रखने के लिए कहना पड़ा.
इटारसी के दुर्गा चौक मंदिर जो कि मूल रूप से दुर्गा मंदिर है इसके परिसर में भी हनुमान जन्मोत्सव पूजा अर्चना हुई और भक्तों ने हनुमान जी को वस्त्र, प्रसाद इत्यादि को अर्पित किया.
आज जब कोरोना ने पूरे प्रदेश में हर छोटे बड़े नगरों को बुरी तरह चपेट में ले रखा है ऐसी स्थिति में हनुमान भक्त इस बात पर गौर नहीं करना चाहेंगे कि जिस अर्रध्य से वो बल, बुद्धि और विद्या की कामना करते है क्या उनसे मिलने वाली इन शक्तियों का वो सही उपयोग कर रहे हैं.
यदि मान भी लिया जाये कि वो हनुमान जी के अनन्य और सच्चे भक्त है तो इतना तो तब भी जानते होंगे कि हनुमान जी स्वयं रामभक्त थे और उन्होंने राम दरबार में सबके सामने साबित करके दिखया था कि राम और सीता उनके ह्रदय में वास करते है और उन्होंने अपनी छाती तक को चीर कर दिखा दिया था. तो क्या हनुमान भक्त बजाये इस महामारी के वायरस के वाहक या संक्रमित होने के स्थान पर घर में ही पूजा अर्चना कर अपने ह्रदय में ही हनुमान दर्शन नहीं कर सकते.
जब तक हमारे देश में कर्तव्य और सच्ची भक्ति को समझने और कानून का पालन करने वाले हम लोग सच्चे भारतीय नहीं बनेंगे तब तक हम अपने आप को राष्ट्रवादी कैसे कह सकते हैं. हमें राष्ट्रवाद की परिभाषा के सही अर्थों को समझने की जरुरत है.
उपरोक्त विचारों के पाठकों से विनयपूर्वक विनती है कि स्वयं एक बार इस पर ज़रूर मनन करें. जिस भी धर्म या पंथ को हम मानते हों हमें अपने-अपने धर्म या पंथ का इस तरह से पालन या पोषण करना होगा जिसमें आडम्बर या पाखंड से ज्यादा मानवता और देश के संविधान का पालन करने का भाव पूरी निष्ठां के साथ हो. तो अब बताइए हनुमान जी से बल, बुद्धि और विद्या मांग कर क्या करोगे जब उसका उपयोग इतर कामों के लिए करोगे जो खुद तुम्हारे अराध्य को पसंद न आये.

इंजी भारतभूषण आर गाँधी
(स्वतंत्र पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता)

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