सबक-ज़िन्दगी के: अंतर्मन की आवाज़ को अनदेखा न करें- डॉ सुजाता मिश्र ,सागर

सबक-ज़िन्दगी के:
अंतर्मन की आवाज़ को अनदेखा न करें

कहते है कि सुरक्षित रहने के लिये थोड़ा सा असुरक्षा का भाव भी बना रहना चाहिए। जब हम लोगों से मिलते हैं या किसी नए स्थान पर जाते हैं तो स्वतः उन लोगों या उस स्थान की ऊर्जा को महसूस करते हैं,और जानें – अनजाने अक्सर हमारा अंतर्मन हमें यह ईशारा कर देता है फलां व्यक्ति कैसा। इसे इंट्यूशन कहते हैं। कुछ लोगों में यह इंट्यूशन बहुत पक्की होती है,पर फिर भी वो अपने स्वभाव के चलते अपनी इंट्यूशन को पूर्वाग्रह समझ कर दबाते हैं, अनदेखा करते है, और नएपन को,नए व्यक्तियों को अपनातें हैं।किन्तु ऐसे मौकों पर अक्सर हमारी इंट्यूशन सही होती है, जो देर – सबेर सच साबित होती है। तब हमें दुःख होता है कि काश हमनें अपने मन की आवाज़ सुनी होती।

किन्तु ऐसे घटनाक्रमों पर पछताने की जगह उनमें छुपे सबक को देखिए। यानि अगली बार किसी नए स्थान पर जानें पर,या किसी नए व्यक्ति से मिलने पर आपके मन में जो भी भाव या विचार आएं उन्हें अनदेखा मत कीजिये। इसका मतलब यह नहीं कि नए को अपनाए ही नहीं, बल्कि इसका मतलब है कि सावधानी के साथ नए को अपनाएं। अपनी इंट्यूशन को कभी हल्के में न लें, खासकर जब आपकों दो – चार बार ऐसे अनुभव हो चुके हो कि जहां आपकी इंट्यूशन सही साबित हुई हो। हम मनुष्य एक – दूसरे को पढ़ने,समझने में काफी समय ले लेते हैं, और फिर भी धोखा खा जातें हैं।किंतु याद रखिये ऊर्जा कभी नकली या झूठी नहीं होती! आप अच्छे बनने का,दिखने का कितना नाटक कर लो किन्तु आपकी ऊर्जा ,लोगों के बीच आपकी मौजूदगी अपनी खामोशी में ही बहुत कुछ बता देती है। उस ऊर्जा को पहचानिए, और भरोसा कीजिये। आप घटिया अनुभवों से बचे रहेंगे। किन्तु फिर भी यदि आप अपनी इंट्यूशन को अनदेखा कर कभी अनुचित परिस्थितियों या घटिया लोगों के बीच फँस जाए तो उससे भी सबक लीजिये और यह सदैव याद रखिये कि बुरे वक्त और घटिया लोगों के साथ बढ़िया बात यह होती है कि कुछ समय बाद ईश्वर ही उन्हें आपके जीवन से बेदख़ल कर देता है…. हाँ उनकी घटिया करतूतों से, घटिया शब्दों, कडवे अनुभवों से आप कुछ पल को आहत होते हो किन्तु जल्द ही ईश्वर स्वयं उनको उठा के आपके जीवन के बाहर फेंक देता है … आपका जीवन स्वतः शांत और सुरक्षित हो जाता है। आप एकाएक बहुत ही शांति और सुकून महसूस करते हैं और तब आपकों समझ आता है कि आप कितने लंबे समय से एक नकारात्मक ऊर्जा की गिरफ्त में थे…. ईश्वर उदार है, आपको कष्ट जरूर देगा , किन्तु यदि हर कष्ट,हर पीड़ा हमारें लिएजीवन का एक सबक बन जाये तो वही कष्ट और पीड़ा आत्मिक विकास की सीढ़ी बन जाती है…. शायद इसीलिए कहते हैं :-

मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है
वही होता है जो मंजूर ए खुदा होता है।

– डॉ सुजाता मिश्र
सागर

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