संवत्सर एवं नवरात्रि का वैज्ञानिक महत्व पर परिचर्चा सम्पन्न

भारतीय शिक्षण मंडल महाकौशल प्रांत महिला प्रकल्प सागर द्वारा “संवत्सर एवं नवरात्रि का वैज्ञानिक महत्व” पर मण्डल परिचर्चा सम्पन्न

सागर।
भारतीय शिक्षा मंडल महाकौशल प्रांत की दुर्गा मंडल संयोजक डॉ प्रीति शर्मा के सौजन्य से संवत्सर एवं नवरात्रि का वैज्ञानिक महत्व पर डिजिटल परिचर्चा संपन्न हुई विषय प्रवर्तक डॉक्टर सरोज गुप्ता ने कहा भारतीय संस्कृति का प्राण तत्व वैज्ञानिकता है हमारे ऋषि-मुनियों को ब्रह्माण्डीय ग्रह नक्षत्रों की स्थिति तथा सूर्य एवं चंद्र की गति के अनुसार दिनों के नाम ऋतु चक्र प्रकृति तथा आकाशीय सूक्ष्म गतिविधियों की जानकारी थी बसंत और शरद ऋतु की संधि काल में संवत्सर अति महत्वपूर्ण है इसलिए इसे नव वर्ष के रूप में मनाते हैं। डॉ प्रतिभा तिवारी ने कहा वैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध हो चुका है कि सूर्य 12 राशियों में भ्रमण पूरा करके पुनः मेष राशि में प्रवेश करता है इस समय कीटाणु की वृद्धि होती है यदि हम व्रत रखते हैं तो कीटाणुओं को पनपने के लिए भोजन नहीं मिलता इसके हम बीमारियों से बच जाते हैं निधि जैन के अनुसार मां दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना गया है हमारे भीतर जो दुर्गा है दुर्गा है वह हमें शक्ति देती है अनुशासन और स्वच्छता का पालन हम करते हैं। दुर्गा पूजा के 9 दिन हमारे शरीर की शुद्धि का समय है हम सात्विक आहार लेते हैं जिससे बुद्धि शुद्ध होती है ।डॉ श्रीमती प्रीति शर्मा के अनुसार नवरात्रि के वातावरण के तमश का अंत होता है और सात्विकता की शुरुआत होती है दुनिया में सारी शक्ति नारी या स्त्री स्वरूप के पास ही है इसीलिए हम इसमें देवी की उपासना की जाती है नवरात्रि अर्थात नकारात्मक से सकारात्मक की ओर आज कोरोना काल में हमें इसी तथ्य की आवश्यकता है ।डॉ उषा मिश्रा के अनुसार भक्ति के लिए शक्ति शक्ति के लिए शुद्धि तथा कर्म के ज्ञान को आराधना उपासना के माध्यम से समझाने का पर्व नवरात्रि है। श्रीमती शोभा सराफ ने कहा नवरात्रि में देवी के नौ स्वरूपों की आराधना करने से आध्यात्मिक उन्नति हवन पूजन करने से पर्यावरण शुद्धि व्रत करने से शारीरिक शुद्धि तथा नौ द्वार वाले इस शरीर रूपी दुर्ग को जीवन संचार करने का नाम ही नवरात्रि है श्रीमती शशि दीक्षित ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि शक्तिपुंज दीपशिखा नारी तुम खुद हो सकती है। श्रीमती अर्चना पाराशर ने कहा नवरात्रि में प्रकृति को ही स्त्री रूप में पूजा जाता है मां दुर्गा को सभी वनस्पतियों की मां शाकंभरी के रूप में पूजा जाता है श्रीमती शोभा मिश्रा के अनुसार भारतीय कालगणना संपूर्ण विश्व में अद्वितीय है हमारे ऋषि-मुनियों ने कालगणना को प्रमाणिक और वैज्ञानिक बनाने के लिए नवरात्र की स्थापना की जाती है। श्रीमती रूपा राज के अनुसार आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति संचय करने के लिए अनेक प्रकार के व्रत संयम नियम यज्ञ भजन पूजन योग साधना आदि करते हैं श्रीमती पुष्पा द्विवेदी ने कहा नवरात्रि में यज्ञ का आयोजन किया जाता है इस समय किया गया हवन पूजन और यज्ञ बहुत अधिक लाभ पहुंचाता है श्रीमती सुधा जैन ने कहा नौ दिनों में लोग वैदिक परंपरा से पूजा हवन करते हैं एवं व्रत रखते हैं जिससे शरीर स्वस्थ रहता है नीलू केसरवानी के अनुसार नवरात्रि के त्यौहार में लोग आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति संचय करने के लिए अनेक प्रकार के व्रत संयम नियम यज्ञ पूजन भजन योग साधना आदि करते हैं श्रीमती आराधना रावत के अनुसार मां शक्ति है समृद्धि है स्थिरता है डॉ अनूप समैया के अनुसार स्वस्थ रहने के लिए तथा शरीर को स्वस्थ रखने के लिए और तन मन को निर्मल और पूर्णता स्वस्थ रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया नवरात्रि है श्रीमती स्नेह लता जैन के अनुसार आनंद नाम का यह संवत्सर सभी के जीवन में स्वास्थ्य सेहत सुख ऐश्वर्य और समृद्धि लेकर आए क्योंकि आनंद का कोई विरोधी शब्द नहीं होता ।श्रीमती मनीषा मिश्रा के अनुसार मन का आत्मा से संपर्क होने पर हमारे भीतर सकारात्मक का संचार होता है श्रीमती उषा वर्मा ने गीत प्रस्तुत किया श्रीमती नंदिनी सोनी, पूनम मेवाती डॉक्टर प्रतिभा श्रीवास्तव आदि मातृ शक्तियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। पटल पर संचालन एवं देवमंत्र श्रीमती शोभा शराफ के द्वारा किया गया ध्येय वाक्य श्रीमती रेणु कटहल के द्वारा प्रस्तुत किया गया। संगठन गीत श्रीमती राजश्री दवे द्वारा प्रस्तुत किया गया। तथा सरस्वती वंदना श्रीमती पूनम मेवाती द्वारा सस्वर गायी गई ।कल्याण मंत्र श्रीमती शशि दीक्षित ने प्रस्तुत किया । अंत में श्रीमती प्रीति शर्मा ने आभार व्यक्त किया एवं इस परिचर्चा को अच्छे ढंग से संचालित करने के लिए सभी मातृ शक्तियों को धन्यवाद व्यक्त किया गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here