काव्य भाषा : बुनियाद के पत्थर कम हैं..- नीलम द्विवेदी रायपुर , छत्तीसगढ़

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बुनियाद के पत्थर कम हैं..

तेरी यादों के सैलाब ने घेरा है मुझे,
आज फिर से हुई मेरी आँखें नम हैं।
अंधेरों की आहट ने डराया है मुझे,
किस्मत में पहले ही उजाले कम हैं।।

उस अधूरी सी कहानी ने पुकारा है मुझे,
तुम्हारे किसी किस्से में सुना है हम हैं।
बेबसी के इक एहसास में डूबाया है मुझे,
मेरी किताब में पहले से ही पन्ने कम है।।

उस उम्मीद के बादल को बुलाएँ कैसे,
फूल सुखी हुई साखों में खिलता कब है।
इस गुलशन को मुरझाने से बचाएँ कैसे,
मेरे बहते हुए दरिया में भी पानी कम है।

इन टूटी हुई दीवारों को हिलाया न करो,
रेत के महलों में किसी का बसेरा कब है।
तूफानों को पता घर का बताया न करो,
मेरे दर में लगे बुनियाद के पत्थर कम हैं।।

नीलम द्विवेदी
रायपुर , छत्तीसगढ़

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