हास्य व्यंग्य: “फिर लॉकडाउन” – सुनील उपमन्यु खण्डवा

हास्य व्यंग्य:-

“फिर लॉकडाउन”

डब्बन भिया चिल्लाते आए -अरे बब्बन औ बब्बन छै फिटेयो ,ऊंचो-पुरो घर में छिप के बैठेयो है ।
अरे बाहर ज़रा सड़कन पर तो देख् लोगन कितनी तेजी से भाग रहे,पुलिस वाले सीटी बजा रहे व – दुकान वाले सटर गिरा रहे है ।
सब्जी वाले,फल वाले, –
किराना वाले भैय्ये को फुर्सत कहाँ ?
बिल्ली के भाग से सिका टुटा ।
इन के लिए लॉकडाउन ख़ुशी ले कर आता है ,व
भरपूर पैसा मिल जाता है।
डब्बन की बड़ बड़ सुन बब्बन भिया -बाहर आए,
पुलिस को देखा तो अंदर भागे किन्तु पुलिस गाड़ी निकल गयी ।
बब्बन भैय्ये बोले-पिछले लॉक डाउन में तो हमरे पुट्ठे सूज गए थे ।
हमारी प्यारी बब्बनियां पिछले लॉकडाउन से बात नी कर रही है,वह भी नाराज चल रही है ,उससे मिलने जाने में पुलिस ने हमारे पुट्ठे सूजा दिए थे ।
हमारी बब्बनियां है तो बहुत अच्छी ,पर कान की कच्ची और स्वभाव से बच्ची । हमने सोचा था कि उसे मना लेंगे ,पर फिर लॉक डाउन लग गया । पिछले लॉकडाउन ने जहाँ कुछ बहुत दिया वहां लिया भी बहुत ।
रिश्ते तार तार हुए,कोई इस पर रहे ,तो कोई उस पार हुए ।किसी की शादी टूटी, किसी की प्रेमिका रूठी ।
कही सच में कोरोना,तो कही केवल भय से रोना,
कोई अस्पताल के बिल से कंगाल,तो कोई कोरोना के कारण मालामाल ।
इस लॉक डाउन में तो पुलिस वाले ज्यादा कुछ नी बोल रहे तो हमारा भी फर्ज है कि हम भी भीड़ बढ़ाने से बचे,बहुत जरूरी हो तो बाहर निकले,मास्क को नाक ,मुँह पर चढ़ा कर रखे ।सेनिट्राइज होते रहे।
डब्बन भैय्ये को बब्बन की बात सच लगी ।
तभी पड़ोस की चांदनी भाभी बोली -बब्बन जी
टी वी में डरावनी बात बताई जा रही है कि अगले 72 घण्टो में स्थति नही सुधरी तो,भयावह स्थति का सामना भारत को करना होगा ।
बब्बन भैय्ये बोले -भाभी,
अब संकट तो आ पड़ो है,
फिर का छोटो, और का बड़ो है । हो सके ऐसी डरावनी न्यूजो से भी लोग घबरा के अंदर रहे ,व सुरक्षित रहे ।
बस उप्पर वाले से एक ही प्रार्थना करो की हे प्रभू !
इस दुखद कोरोना को सबक सीखा कर ऐसा गायब कर कि फिर भारत की ओर ये देखें नी और “फिर लॉक डाउन की जरूरत पड़े नी ।

सुनील उपमन्यु
खण्डवा

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