पुस्तक : वैश्विक त्रासदी भारत पर आर्थिक एवं सामाजिक प्रभाव – समीक्षक :प्रीति शर्मा ‘असीम ‘ ,नालागढ़

समीक्षा :
हाल ही में प्रकाशित किताब:” वैश्विक त्रासदी भारत पर आर्थिक एवं सामाजिक प्रभाव “:- वैश्विक कोरोना संकट का अर्थशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करती महत्वपूर्ण एवं सामयिक किताब

पिछले एक वर्ष से समूचा संसार जिस संकट से ग्रसित है और संपूर्ण मानव समाज जिस आर्थिक , सामाजिक , स्वास्थ्य, रोजगार, शैक्षणिक , मानवी य और भावनात्मक आपदा से गुजर रहा है, उसकी पृष्ठभूमि और भारत पर होने वाले आर्थिक प्रभावों को समझने के लिए अर्थशास्त्री डॉ अमिताभ शुक्ल की सद्य प्रकाशित किताब वैश्विक त्रासदी भारत पर आर्थिक एवं सामाजिक प्रभाव को पढ़ना लाजमी है . इस किताब में वैश्विक त्रासदी को वैश्विक अर्थव्यवस्था, बहुराष्ट्रीय कंपनियों , विश्व व्यापार अंतरराष्ट्रीय पूंजीवादी आर्थिक ढांचे से प्रभावित आर्थिक नीतियों का विश्लेषण करते हुए तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया गया है। विषय के विभिन्न पहलुओं को बारह अध्याओं में विभक्त किया गया है, जिससे विषय के कठिन आर्थिक एवं तकनीकी पहलुओं को सरल भाषा में और स्पष्ट रूप से पाठकों तक पहुंचाया जा सके । चार दशकों से आर्थिक विश्लेषण का अनुभव प्राप्त अर्थशास्त्री लेखक ने निष्पक्ष दृष्टि से विश्व अर्थव्यवस्था और विश्व व्यापार के साथ ही विश्व की 7.5 बिलियन जनसंख्या को प्रभावित करने वाली इस त्रासदी को ” विश्व व्यापार युद्ध ” की संज्ञा दी है , जो सारे ताने-बाने और उसके प्रभाव को देखते हुए , सत्य प्रतीत होती है । डॉक्टर शुक्ल ने भारत की आर्थिक नीतियों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रभाव और हस्तक्षेप से प्रभावित आर्थिक नीतियों का भी विश्लेषण प्रस्तुत किया है । भारत पर प्रभाव को समझने के लिए उन्होंने देश की आर्थिक नीतियों के संदर्भ में भारत के सामाजिक – आर्थिक ढांचे और मानव जीवन के एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू ‘ खुशहाली के स्तर ‘ के संदर्भ में भारत की तुलना विश्व के अन्य देशों से करते हुए प्रतिपादित किया है कि , भारत खुशहाली के स्तर से बहुत दूर है। उन्होंने वैकल्पिक आर्थिक नीतियों का सुझाव भी प्रस्तुत किया है और ‘ आत्मनिर्भरता के दावे ‘ को केवल नारे की संज्ञा देते हुए वास्तव में आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के लिए स्वदेशी संसाधनों के उपयोग और रोजगार को बढ़ाने वाली आर्थिक नीतियों का सुझाव प्रस्तुत किया है । विषय के महत्व , अमेरिका सहित पूंजीवादी देशों की विकासशील देशों की शोषणकारी नीतियों के प्रभाव स्वरूप उत्पन्न संकट को अमेरिका की मेन यूनिवर्सिटी के प्रो डग्लस एलेन ने किताब की भूमिका में विश्लेषित किया है . उन्होंने प्रो शुक्ल के विश्लेषण को अत्यंत उपयोगी और भावी चुनौतियों के संदर्भ में अत्यंत सामयिक निरूपित करते हुए भारत के सदर्भ में भी विकास की चुनौतियों का सामना करने हेतु अत्यंत उपयोगी बताया हे । 90 पृष्ठ में विषय का सांगोपांग विश्लेषण अत्यंत सामयिक , महत्वपूर्ण और उपयोगी है , जिसके लिए निश्चित ही लेखक बधाई के पात्र हैं । किताब पर सम्मतिवस्वरुप देश के प्रसिद्ध अर्थशास्त्रियों , लेखकों एवं पत्रकारों द्वारा किताब की सराहना किया जाना भी उपयुक्त है । अतः निश्चित ही इस सामयिक एवं उपयोगी किताब के लिए लेखक डॉ अमिताभ शुक्ल बधाई के पात्र हैं।
वैश्विक त्रासदी : भारत पर आर्थिक एवं सामाजिक प्रभाव. लेखक: डॉ अमिताभ शुक्ल. प्रकाशक: बुक रिवर्स पब्लिकेशंस लखनऊ । जनवरी 2021 .
पृष्ठ संख्या – 90. मूल्य – रुपए 200/ –

समीक्षक – प्रीति शर्मा ‘असीम ‘
नालागढ़ ,पंजाब – हिमाचल प्रदेश .

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here