काव्य भाषा : नज़्म – अदिति टंडन, आगरा .

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नज़्म

तुम्हारी मोहब्बत आतिश सी ।
जो हमारा हर गम पिघला दे ।।

हमारा इश्क बर्फ़ सा जिसकी ,
तासीर हर तकलीफ़ भुला दे ।

तुम्हारी मोहब्बत लफ़्ज़ों सी ,
जो एहसासों को जुबां दे ।

हमारा इश्क साज सा जो ,
जज़्बातों को नज़्म बना दे ।

तुम्हारी मोहब्बत रूह सी ,
जो ज़िंदगी को मक़सद दे ।

हमारा इश्क सांसों सा ,
जो जिस्म को वजूद दे ।

अदिति टंडन
आगरा .

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