काव्य भाषा : दो कविताएं होली की…-सर्वज्ञ शेखर,आगरा

दो कविताएं होली की…
1.
रंगों में सब से पावन रंग तिरंगा

रंगों का त्योहार है होली,अजब- गजब हैं इसके रंग,
हर रंग की है अलग कहानी, सुनो आज आप मेरे संग ।

धूमधाम से पर्व मनाओ, लगाओ रंग नीला पीला लाल,
मस्तक पर हो चंदन सुरभित, रंगों से सजे हों गाल।

श्वेत रंग है प्रतीक शांति का, इस रंग से सब रंग जाओ,
गले मिलो प्रेम प्यार से, झगड़े पुराने भूल जाओ।

लाल रंग है जोश प्रेम का,पीले से मिलती नव ऊर्जा,
नारंगी से बढ़ता पराक्रम,गेरुआ से हो धर्म की पूजा।

नीला रंग है नील गगन का,हरे से होती हरियाली,
गुलाबी रंग है रोमांस का,सारी दुनिया मतवाली।

काले रंग को पोत दो, दुश्मनों के गाल पर,
केसरिया चंदन को मल दो, सैनिकों के भाल पर।

मेरा रंग दे वसंती चोला,गाकर बाजी लगा दी जान की,
इंद्रधनुषी रंगों सी चमके,छवि मेरे हिंदुस्तान की।

सबसे पावन रंग तिरंगा,लहर लहर लहरा दो,
आसमान को छू ले, इतना ऊँचा फहरा दो।

अरे,प्रेम का रंग रह गया, फागुन का असली रंग रंगोली।
यह रंग चढ़ जाए तो खेले, जेठ बहू के संग होली।

यह है सारे रंगों की महिमा,रंग ही हैं जीवन की धारा,
बाहर निकलो बेरंगी दुनिया से,फिर देखो रंगीन नज़ारा।

2.
भूल न जाना होली की ठिठोली में

रंगों की उड़ेगी बौछार
घूमेंगे हुरियारी टोली में
अबीर गुलाल की होगी बहार
होली की मस्त ठिठोली में
भीगेंगे पानी में हमसब
रंग बरसेगा चोली में

गले मिलना शिकवे मिटाना
भूल न जाना
होली की ठिठोली में

खूनी होली खेल रहे
आतंकी पड़ोस से आ के
शहीद हो रहे सपूत भारत माँ के
छाती पर गोली खा के
तोप चलाओ मिसाइल दागो
कुछ नहीं रखा वार्ता बोली में

लेना है भीषण बदला उनसे
भूल न जाना
होली की ठिठोली में

जो भी दीखे लाचार
गरीब दीन दुखियारा
सब मिल के देना उसको
थोड़ा सा सहारा
जाना विधवाश्रम, अनाथालय
कुछ डाल देना उनकी झोली में

ये भी सब अपने ही हैं
भूल न जाना
होली की ठिठोली में
रिश्ते नातों की मर्यादा
भूल न जाना
होली की ठिठोली में

सर्वज्ञ शेखर
आगरा

1 COMMENT

  1. बहुत सुंदर कविताएं सर्वज्ञ जी। बहुत बहुत बधाई।

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