विविध : बुरा क्यों न मानें, होली है – -सर्वज्ञ शेखर,आगरा

बुरा क्यों न मानें, होली है

“बुरा न मानो होली है” का उद्घोष कब शुरू हुआ, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। पर होली पर बुरा न मानो की बात दशकों से कही जा रही है। प्राचीन काल में मनोरंजन के साधन कम थे। विभिन्न पर्व, त्योहार आध्यात्मिक संस्कारों के प्रतीक तो होते ही थे, आमोद-प्रमोद, हास-परिहास का भी माध्यम होते थे। होली का पर्व ऐसा ही है जब बुरा न मानो के नाम पर हुल्लड़बाजी, फूहड़ता, महिलाओ के प्रति अभद्रता, रिश्ते नातों की मर्यादा का उल्लंघन सर्वाधिक होता है। हमारा उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को आहत करना नहीं है। होलिका दहन व रंग गुलाल लगा कर सद्भाव प्रकट करना पर्व का मूल भाव है। उससे आगे जो होता है वह त्योहार से इतर है। ‘साली आधी घरवाली’, ‘फागुन में जेठ कहे भाभी’ जैसी उक्तियाँ युवकों को उत्तेजित करती हैं जो महिलाओं के प्रति अपराधों को बढ़ावा देती हैं। ऐसी बातों का जरूर बुरा मानना चाहिए और डट कर विरोध करना चाहिए।

हुल्लड़बाजी व शराब या भांग पी कर उत्पात मचाने वाले अपनी तो अपनी दूसरों की जान जोखिम में डालते हैं। ऐसी उत्पाती घटनाओं का भी जरूर बुरा मानना चाहिए।
पिछली साल मेरठ और आसपास के इलाकों में होली का हुड़दंग, खुमारी और तेज रफ्तार जिंदगी पर भारी पड़ गई। हादसे दर हादसे होते रहे और लोग सड़कों पर दम तोड़ते रहे। मेरठ और आसपास के जिलों में हुए अलग-अलग हादसों में करीब 28 लोगों की मौत हो गई। मारपीट और संघर्ष की घटनाएं भी होली के रंग में भंग डालती रही।पटियाला में भी होली पर जिले में चार सड़क हादसे हुए और इन हादसों में चार लोगों की जान चली गई थी। 2019 की होली में गाजियाबाद में होली खेलने को लेकर घर के बाहर झगड़ा कर रहे 2 पक्षों को समझाने गए युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। ये तो दो साल की घटनाएं हैं। हर साल ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएँ होती हैं। कभी कभी ये घटनाएँ साम्प्रदायिक रूप भी ले लेती हैं।

होली पर विगत वर्ष भी कोरोना की काली छाया थी, इस बार भी कोरोना-2 के बढ़ते खतरे ने होली पर आयोजित होने वाले समारोहों को अनुशाषित किया है। उत्तर प्रदेश में होली के सार्वजनिक समारोहों के लिए पूर्व अनुमति लेनी होगी, 10 वर्ष से कम व 60 वर्ष से ऊपर के लोग सार्वजनिक समारोहों में भाग नहीं ले सकेंगे। अनुमति के बाद भी जो कार्यक्रम होंगे उनमें भाग लेने वालों को मास्क, शारीरिक दूरी व सेनेटीजेशन के नियमों का पालन करना ही होगा।

दिल्ली मेंडीडीएमए ने अपने आदेश में कहा कोरोना के बढ़ते केसों को देखते हुए सार्वजनिक जगहों पर होली और अन्य त्योहार मनाने पर रोक है।इसी के साथ कोरोना वायरस की स्क्रीनिंग, टेस्टिंग, आईसोलेशन और सर्विलांस के नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। दिल्ली के साथ बीएमसी ने भी मंगलवार को साफ कर दिया कि मुंबई में भी सार्वजनिक तौर पर होली मनाने की अनुमति नहीं होगी।बीएमसी ने एक सर्कुलर जारी कर कहा है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर महामारी रोग अधिनियम 1897 और आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मध्यप्रदेश में भी होली को लेकर गाइडलाइंस जारी की गई हैं। गाइडलाइंस के अनुसार भीड़-भाड़ में होली खेलने पर रोक रहेगी।सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए हर रविवार को लॉकडाउन की घोषणा की है।होलिका दहन वाले दिन भी रविवार है, जिस वजह से लॉकडाउन लागू रहेगा।चंडीगढ़ में प्रशासन ने होली पर किसी भी तरह के सार्वजनिक कार्यक्रम की इजाजत नहीं दी है।प्रशासन के मुताबिक क्लब, रेस्टोरेंट और होटलों को किसी भी तरह के कार्यक्रम आयोजन की अनुमति नहीं दी गई है।गुजरात में होली मनाने की इजाजत दे दी गई है, लेकिन साथ में कुछ शर्तें भी लगाई गई हैं। होलिका दहन पर सीमित लोगों को मंजूरी दी गई है।वहीं धुलेंड़ी वाले दिन भीड़-भाड़ से बचने की सलाह दी गई है।कम लोगों के साथ होलिका दहन किया जा सकेगा। रंग खेलने की इजाजत नहीं होगी। नियमों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई होगी। इन सब नियमों का जो पालन न करे तो आपको जरूर बुरा लगना चाहिए।

यह तो थी सार्वजनिक कार्यक्रमों की बात। घर पर भी कोई मिलने आए तो ध्यान रखें कि आप व आगन्तुक दोनों मास्क पहने हों। परंपरागत रूप से गले न मिलें, दूर से नमस्ते करें और होली की बधाई दें। ऐसा न करने वालों का बुरा जरूर मानें और प्यार से समझा दें कि जीवन सुरक्षित रहा तो होली अगले वर्ष जोर-शोर से मना लेंगे। होली मनाइए पर सतर्कता के साथ।

आप सभी को होली की बधाई व शुभकामनाएँ।

-सर्वज्ञ शेखर,आगरा
स्वतंत्र लेखक, साहित्यकार
8192000456
gupta.ss05@gmail.com

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