डॉ शाम्भवी के समूह व एकल कथक नृत्य ने बाँधा समां

डॉ शाम्भवी के समूह व एकल कथक नृत्य ने बाँधा समां

मैहर।
पद्मभूषण बाबा अल्लाउद्दीन खान की स्मृति में सतना मैहर में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय संगीत समारोह की समापन संध्या में डॉ शाम्भवी शुक्ला की कथक समूह प्रस्तुति ने दर्शकों के मन पर गहरी छाप छोड़ी l कार्यक्रम का शुभारम्भ मैहर वाद्यवृंद की प्रस्तुति से हुआ l द्वितीय प्रस्तुति लखनऊ की श्वेता यामिनी की कथक प्रस्तुति रही l श्री राकेश चौरसिया की बाँसुरी ने भी मन मोहा l डॉ शाम्भवी ने देवी स्तुति पश्चात बुन्देलखण्ड क्षेत्र के लोक कवि ईसुरी उर्फ ईश्वरी प्रसाद तिवारी की चौकडि़या फाग और उनके समकालीन श्री खूबचंद जी की दोहा युक्त सप्तपदी फाग.. ब्रज में छाए रही अरुणाई को नृत्य के रंग से सराबोर किया l श्री बृजेश मिश्रा ने इस होली का संगीत संयोजन कर अपने प्रभावशाली गायन से दर्शकों का मन जीत लिया l तबला संगत श्री संगीत हरिदास, पढ़न्त डॉ कविता शुक्ला, सितार पर श्री नीरज मिश्रा, और बाँसुरी पर श्री शनिश ने सहयोग किया l अपने गुरु डॉ शाम्भवी द्वारा की गई नृत्य संयोजना को नर्तक दल की कु इप्सा, कु. कंचन और श्री आकाश ने बख़ूबी पेश कर मंच पर होली का समां बांध दिया ।राज्य मंत्री श्री राम खेलावन, और विधायक जी ने अंत में सभी कलाकारों को स्मृति चिन्ह व पुष्प गुच्छ से सम्मानित किया।

डॉ चंचला दवे

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