संस्मरण – स्मरण जीवन को ऊर्जा से भर देते हैं -पवन गुबरेले

संस्मरण – स्मरण जीवन को ऊर्जा से भर देते हैं -पवन गुबरेले

होशंगाबाद।
शासकीय नर्मदा महाविद्यालय के प्राध्यापकों ने आज दिनांक 20 मार्च 2021 को गोवा आंदोलन के आंदोलनकारी श्री रमेश सैनी जी का उनके घर जाकर शॉल श्रीफल से सम्मान एवं अभिनंदन किया | गुमनाम सेना नायकों के सम्मान में और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में शासकीय नर्मदा महाविद्यालय के द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के उत्तराधिकारी को बुलाकर सम्मानित किया |उन्होनें संस्मरण सुनाकर स्वतंत्रता संग्राम की यादों को सहेजा | इस अवसर पर विधायक प्रतिनिधि दिनेश चौकसे, की उपस्थिति में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ ओ एन चौबे ने सम्मानित अतिथियों का सादर अभिनंदन किया |कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर आशा ठाकुर ने किया | प्रतिवेदन प्रस्तुति डॉ अंजना यादव ,डॉक्टर दिनेश श्रीवास्तव ने की |
आजादी का अमृत महोत्सव की श्रंखला में आज स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान का दिन रहा | नर्मदा महाविद्यालय में भव्य समारोह के साथ विभिन्न सेनानियों के वंशज पुत्र और पुत्रों ने अपने अनुभव संस्मरण और घटनाओं को सुनाया | सभागार में उपस्थित लोग कई बार भावुक भी हो गए सम्मान समारोह का प्रारंभ डॉक्टर ओ. एन. चौबे ने शुभकामना संदेश से किया | उन्होंने कहा कि देश की आजाद के 75 वर्षों बाद ऐसे त्यौहार का आयोजन हो रहा है | हम बहुत खुशनसीब हैं जो इसका हिस्सा बने |अनुराग मिश्रा ( पुत्र स्वर्गीय अश्विनी मिश्रा स्वतंत्रता सेनानी )ने बताया कि वास्तव में दिव्य साधना ओं के बाद अवतरित हुई आत्माएं हमारे स्वतंत्रता सेनानी थे जो ऋषि तुल्य और महापुरुषों के समान थे | उन्होंने अपने पिताजी के 1942 से भारत छोड़ो आंदोलन में किए गए क्रांति कारी कार्यों को सुनाया और बताया कि उन्होंने 1942 में तिरंगा फहराया था बाद में उसी मल्टीपरपज स्कूल में प्राचार्य बनकर पूरा तिरंगा फहराया |
डॉक्टर नवीन जैन ने अपने पिता श्री निर्मल जैन जी के कई संस्मरण सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार वे वेश बदलकर महिला के रूप में अपने अन्य साथियों के साथ क्रांति के लिए जाया करते थे | किंतु आज हम मानसिक राजनीतिक व्यवस्था के गुलाम हो गए | सत्ता में खो गए हैं | हमें इस आजादी के लिए देश की व्यवस्था बदलनी ही होगी | मंजुलता दीदी ने लाला अर्जुन सिंह के वह स्मरण सुनाएं जो बेहद संवेदनशील थे | उन्होंने बताया कि वह आजीवन अविवाहित रहकर देश सेवा में लगे रहे | शहर के कई स्थान उनकी क्रांति के गवाह हैं | उन्होंने हरिजन उद्धार और हरिजन संहिता किताबों की रचना भी की थी | सन 1970 में होशंगाबाद शहर ने अपने इस वीर पुत्र को खो दिया | श्री राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ने भी लाला अर्जुन सिंह से जुड़े संस्मरण सुनाए और विद्यार्थियों से कहा कि हमें उस पर मनन करना होगा और अन्याय के प्रति जागरूक होने के साथ विरोध भी करना होगा | हमारे शहीदों ने भी अंग्रेजी साम्राज्य का विरोध करके हमें जीना सिखाया था | इस कड़ी में श्री पंकज बरगले ने अपने ओजपूर्ण संबोधन में कहा कि अमृत महोत्सव ने हममेम ऊर्जा का संचार किया है | उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता सेनानियों में आजादी का ऐसा जुनून था कि उन्हें अपने घर में बच्चों और परिवार के साथ व्यतीत करने का कोई लालच ना था | ना ही उनके पास वक्त था | वे यह भी नहीं जानते थे कि उनके बच्चों के स्कूलों में क्या नाम दर्ज हैं | आजादी के बाद 19 महीने उन्होंने आपातकाल में जेल में भी गुजारे | वह कर्म को ही धर्म मानते थे | उनके संस्मरण हमें ऊर्जा देते हैं | छात्र देवांश बैरागी ने शहीद कुंवर सिंह की वीरता और शहादत को सुनाते हुए कहा कि 85 वर्ष की अवस्था में वे अपना वह हाथ काट कर गंगा में फेंक देते हैं जिस पर अंग्रेज ने गोली चलाई थी | अब हमारी बारी है कि जिन्होंने देश को एक स्वर्णिम इतिहास दिया है हम यह समृद्धि भविष्य की ओर ले जाएं |डॉ अर्पणा श्रीवास्तव ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया | छात्र शिवम द्विवेदी ने अपने दादाजी अतुल चंद्र द्विवेदी के संस्मरण सुनाए कि 1943 में उन्होंने जबलपुर साइंस कॉलेज में तिरंगा झंडा फहराया | छिंदवाड़ा पावर हाउस के सामने उनकी प्रतिमा आज भी विराजित है और उनके नाम से द्विवेदी मार्ग छिंदवाड़ा में जाना जाता है | डॉ विनीता अवस्थी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि हमने अपने सेनानियों का ऋण चुकता कर दिया तो हमसे वह भाव खत्म हो जाएगा इसलिए उन्हें सदैव अपने स्मृति पटल पर रखे और उनके कर्जदार बने रहें | डॉक्टर रश्मि तिवारी के दादाजी भी स्वतंत्रता संग्राम के कार्यकर्ता थे जो हमेशा आंदोलनों का हिस्सा बने रहे | डॉ
कार्यक्रम की समन्वयक डॉ हंसा व्यास ने विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह शहादत ही हमें सिखाती है कि गुलामी के दंश झेलने से तो अच्छा है देश के लिए मर मिटे |कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार के साथ महाविद्यालय के प्राध्यापक गण सम्मिलित रहे डॉ बीसी जोशी ,डॉ एस सी हर्णे, डॉ बी एल राय, डॉ रश्मि तिवारी ,डॉ ममता गर्ग ,डॉ दिनेश श्रीवास्तव, डॉ अंजना यादव ,डॉ अर्पणा श्रीवास्तव ,मेघा रावत तथा अत्यधिक संख्या में छात्र उपस्थित रहे |

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