काव्य भाषा : नज़्म – अदिति टंडन ,आगरा

नज़्म

हमराह बनने की चाहत
दिल में रही
पर एक इनायत कर
कि …
तेरे अश्कों के
हकदार हम बनें

हमदम तो न बन सके
पर एक आरजू है
कि …
तेरे गमगुसार हम बनें

हमनवां की ख्वाहिश
अधूरी रही
पर एक तमन्ना है
कि …
तेरी हर गुफ्तगू में
ज़िक्र – ए – यार हम बनें ।

अदिति टंडन
आगरा .

– गमगुसार _ हमदर्द

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