काव्य भाषा : महाशिवरात्रि – राजीव रंजन शुक्ल पटना

महाशिवरात्रि

फाल्गुन कृष्ण की चतुर्दशी
माना जाता है प्रारंभ हुआ इसी दिन सृष्टि
पावन है यह रात्रि
मनाया जाता है महाशिवरात्रि
बारह शिवरात्रियों में से सबसे महत्वपूर्ण
महाशिवरात्रि मे भक्ति से मन है परिपूर्ण
कहती है एक पौराणिक कथा
ब्रह्मा जी और समस्त देवताओं ने भगवान विष्णु को सुनाई
दानवों के कारण देवताओं की कष्ट भरी जीवन व्यथा
राजा बलि के राज्य में दैत्य, असुर तथा दानव हो गए थे अति प्रबल
दुर्वासा ऋषि के शाप से देवराज इन्द्र मे नहीं रहा था पुराना बल
इसी समस्या के समाधान मे किया गया था समुद्र मंथन
भगवान कच्छप के एक लाख योजन चौड़ी पीठ पर लगा मन्दराचल पर्वत घूमने
समस्त देवताओं का मन अच्छा होने की आशा मे लगा झूमने
अमर अमृत निकलने की आस जागने लगी
अब दानवों की शाम ढलने लगी
इस मंथन मे चौदह रत्न था निकला
परंतु समुद्र मंथन से सबसे पहले जल का हलाहल विष निकला
उस विष की ज्वाला से सभी देवता और दैत्य जलने लगे
सभी मिलकर भगवान शिव से बचाने की प्रार्थना करने लगे
ब्रह्मांड को यह विष कर सकता था नष्ट
ब्रह्मांड को बचाने भगवान शिव ने दिया स्वयं को कष्ट
भगवान शिव ने अपने कंठ रखा था विष हलाहल
देवताओं मे मच गया था कोलाहल
जहर था अतिशक्तिशाली, भगवान शिव का भी कंठ नीला कर दिया
और अपने भगवान शिव को ‘नीलकंठ’ का नाम दिया
तब से भगवान शिव ‘नीलकंठ’ कहलाए
विष प्रभाव दूर करने को
देवताओं ने भगवान शिव को रात भर जगाए
इस रात्री नृत्य के साथ-साथ संगीत भी बजाए
प्रसन्न भगवान शिव ने सुबह भक्तों को दिया आशीर्वाद
महाशिवरात्रि पर्व का मिला सभी भक्तों को प्रसाद
भक्त करते हैं इस दिन भजन ,प्रार्थना,व्रत और उपवास
सम्पूर्ण विश्व के जीव जंतुओं का हो कल्याण, करते है आस और विश्वास ॥

राजीव रंजन शुक्ल
पटना ,बिहार

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here