काव्य भाषा : हे विश्वेश्वर विषपान करो – दिनेश सिंह सेंगर अम्बाह

हे विश्वेश्वर विषपान करो

हे आशुतोष शिव जगत गुरु,
कल्याण रूप कल्याण करो
परवाह करो जग की भगवन्
जग को नवजीवन दान करो।
करुणा मय प्रभु करुणा करके,
जग जीव जगत का कष्ट हरो
जग के कल्याण हेतु फिर से,
हे विश्वेश्वर विष पान करो।।

हे पंचानन वृषकेतु शिवम् ,
त्रिपुरारि मेरे त्रय ताप हरो
अब भीषण तममय ममजीवन,
ममजीवन में नव रंग भरो।
हे महादेव शिव-शक्ति नमो:,
मेरी विनती स्वीकार करो
प्रभु दया करो हे विश्वेश्वर,
मुझको निज भक्ति प्रदाय करो।।

कवि दिनेश सिंह सेंगर
अम्बाह जिला मुरैना मध्यप्रदेश

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here