काव्य भाषा : फैशन – संजय जैन मुंबई

फैशन
विधा : गीत

फैशन का यह दौर
सुहाना लगता है।
अच्छा खासा मर्द
जनाना लगता है।
पल भर में कैसे
बदलते है नक़्शे।
अब तो हर लड़का
शबाना लगता है।
फैशन का यह दौर
सुहाना लगता है।
अच्छा खासा मर्द
जनाना लगता है।।

कैसे कैसे वो
परिधान को पहनता है।
और कैसा कैसा
करता है अपना श्रृंगार।
फर्क समझा आता नहीं है
इसमें लोगो को।
कौन नर और कौन
मादा है सही में।
अब तो फैशन से
बहुत डर लगता है।
अच्छा खासा मर्द
जनाना लगता है।।

नाक-कान छिदवाकर
वो बालो को बढ़ता है।
पहनकर नारी परिधान आकर्षित करता है।
बहुत गजब का
आजकल का ये फैशन है।
तभी तो अच्छा खासा
मर्द जनाना लगता है।।
फैशन का यह दौर
सुहाना लगता है।
अच्छा खासा मर्द
जनाना लगता है।।

संजय जैन
मुंबई

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